हरियाणा

बड़ा हादसा: झूला टूटने से 3 बच्चों को लगी चोंट, मौके पर नहीं मिली एम्बुलेंस

Gulabi Jagat
2 Jun 2022 9:46 AM GMT
बड़ा हादसा: झूला टूटने से 3 बच्चों को लगी चोंट, मौके पर नहीं मिली एम्बुलेंस
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तीन मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए
बहादुरगढ़: बहादुरगढ़ के फन टाउन वाटर पार्क में झूला टूटने से एक ही परिवार के तीन मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। तीनों बच्चों के सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोट आई है। गंभीर हालत में बच्चों को बहादुरगढ़ के डीडीके हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। जहां उनकी हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। बच्चों की चोट गहरी होने के कारण टांके भी आए हैं। हादसे के बाद वाटर पार्क प्रबंधन की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है। बताया जा रहा है की हादसा होते ही वाटर पार्क की कर्मचारी मौके से भाग खड़े हुए। घायल मासूमों को ना तो मौके पर एंबुलेंस और चिकित्सा सहायता मिली और ना ही सेफ्टी उपकरण।

दिल्ली के राजौरी गार्डन रहने वाले श्रीकांत और उसकी बहन का परिवार बहादुरगढ़ के आसौदा गांव स्थित फन टाउन वाटर पार्क में मौज मस्ती करने पहुंचा था। बच्चों ने वॉटर राइड का खूब लुफ्त उठाया और बाद में बच्चे झूले झूलने लगे। जब बहुत सारे बच्चे एक टॉय ट्रेन वाले झूले पर सवार हुए तो अचानक से झूले की स्पीड बढ़ गई। जिसकी वजह से टॉय ट्रेन वाले झूले के पीछे लगे दो डिब्बे टूट कर दूर जा गिरे। इसके नीचे दबने से कई बच्चों को चोटें आई। जिनमें से तीन बच्चे एक ही परिवार के हैं।

मौके से भागे वाटर पार्क के कर्मचारी
हैरानी की बात की है कि हादसे के तुरंत बाद वाटर पार्क के कर्मचारी मौके से भाग खड़े हुए। परिजनों ने बताया कि उन्होंने बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रबंधन से गुहार लगाई। लेकिन कोई भी कर्मचारी उनका साथ देने के लिए तैयार नहीं हुआ। मौके पर ना तो बच्चों को फर्स्टऐड दी गई और ना ही किसी तरह की एंबुलेंस वहां तैनात थी। सेफ्टी उपकरण भी मौके पर नहीं मिले। बाद में वाटर पार्क में घूमने आए अन्य परिवारों ने बच्चों को अस्पताल पहुंचाया।
हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई

तीनों बच्चों के हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। बच्चों को गहरी चोट के कारण टांके भी लगाए गए हैं। बच्चों के साथ अचानक हुए हादसे के कारण बच्चे अभी सदमे में और दर्द से परेशान है। वाटर पार्क प्रबंधन की लापरवाही के कारण हुए हादसे की शिकायत परिजनों ने ट्विटर के जरिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर स्थानीय प्रशासन को की। जिसके बाद एसडीएम भूपेंद्र सिंह ने देर रात अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हालचाल जाना और पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू की।
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