
चंडीगढ़। हरियाणा में एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों और कस्बों के बाहर रिंग रोड तथा नेशनल हाईवे बनाए जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिसार बाईपास, कुरुक्षेत्र बाईपास, नारनौल सिटी बाईपास, जींद बाईपास और सोहना-पलवल बाईपास के निर्माण कार्य को स्वीकृति दे दी है। शनिवार को मास्टर प्लान और राज्य के वित्तीय योगदान के मॉडल को लेकर आयोजित बैठक में ये निर्णय लिए गए।
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा और अधिकारियों के साथ बैठक में सड़क परियोजनाओं पर चर्चा की। बैठक का विषय मास्टर प्लान के तहत ‘एडाप्शन ऑफ फाइनेंशियल मॉडल फॉर स्टेट कंट्रीब्यूशन’ था। इसमें राष्ट्रीय राजमार्गों से शहरी क्षेत्रों में होने वाली भीड़भाड़ कम करने के लिए शहरों के बाहर सड़क संपर्क विकसित करने का निर्णय लिया गया। पांच बाईपास परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने से संबंधित क्षेत्रों में बाहरी सड़क मार्ग तैयार करने की योजना आगे बढ़ी है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने हिसार बाईपास के प्रस्तावित संपर्क की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि यह बाईपास हिसार-राजगढ़ रोड स्थित एनएच-52 से हिसार-दिल्ली रोड और हिसार-कैथल रोड को जोड़ने का कार्य करेगा। इस प्रकार परियोजना का उद्देश्य हिसार से जुड़े प्रमुख सड़क मार्गों के बीच संपर्क उपलब्ध कराना है। उपलब्ध विवरण में इसी बाईपास के मार्ग संबंधी जानकारी दी गई है। अन्य स्वीकृत बाईपास परियोजनाओं का विस्तृत मार्ग अभी इस जानकारी में शामिल नहीं है।
शहरों के बाहर बाईपास और रिंग रोड विकसित करने की योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्र में यातायात का दबाव कम करना है। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाला यातायात जब शहर के भीतर पहुंचता है, तो उसका संपर्क स्थानीय आवागमन से होता है। बाहरी मार्ग उपलब्ध होने पर आगे जाने वाले वाहनों को शहर के बीच से गुजरने का विकल्प बदल सकता है। सरकार ने इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों और कस्बों के बाहर सड़क ढांचा विकसित करने की बात कही है।
स्वीकृत परियोजनाओं में हिसार के अलावा कुरुक्षेत्र बाईपास और नारनौल सिटी बाईपास भी शामिल हैं। जींद बाईपास तथा सोहना-पलवल बाईपास के निर्माण कार्य को भी मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी है। ये पांचों परियोजनाएं बैठक में लिए गए निर्णय का प्रमुख हिस्सा हैं। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इनकी लंबाई, निर्माण लागत, लेन की संख्या या जमीन की आवश्यकता का उल्लेख नहीं है। इसलिए परियोजनाओं के आकार और कुल खर्च को लेकर अभी निश्चित जानकारी नहीं दी जा सकती।
रिंग रोड और बाईपास शहरी यातायात के प्रबंधन में अलग-अलग प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं। रिंग रोड शहर के बाहरी हिस्सों में विभिन्न मार्गों को जोड़ने का विकल्प देता है, जबकि बाईपास आगे जाने वाले यातायात के लिए शहर से बाहर गुजरने का मार्ग उपलब्ध कराता है। हरियाणा की योजना में शहरों के बाहर इन सड़क सुविधाओं को विकसित करने पर जोर है। वास्तविक यातायात लाभ संबंधित मार्ग की बनावट, उसके संपर्क बिंदुओं और निर्माण पूरा होने के बाद स्पष्ट होगा।
बैठक में राज्य के वित्तीय योगदान के मॉडल पर भी विचार किया गया। सड़क परियोजनाओं में राज्य की भागीदारी का वित्तीय स्वरूप इस चर्चा का विषय था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में योगदान की राशि, प्रतिशत या केंद्र और राज्य के बीच खर्च के विभाजन का विवरण नहीं है। किसी विशेष परियोजना के लिए अलग वित्तीय व्यवस्था का उल्लेख भी नहीं किया गया है। फिलहाल बैठक के विषय और पांच बाईपास के निर्माण को मिली स्वीकृति की जानकारी सामने आई है।
हिसार बाईपास के संबंध में बताए गए तीन प्रमुख सड़क संपर्क परियोजना की भूमिका समझने में मदद करते हैं। हिसार-राजगढ़ रोड के एनएच-52 हिस्से से हिसार-दिल्ली रोड और हिसार-कैथल रोड का जुड़ाव बाहरी आवागमन के लिए विकल्प तैयार कर सकता है। हालांकि, किस स्थान पर मार्ग जुड़ेगा और उसका पूरा नक्शा कैसा होगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए दूरी घटने या यात्रा समय में किसी निश्चित कमी का दावा अभी नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री की स्वीकृति निर्माण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से जुड़ा निर्णय है। इसे सभी बाईपास का निर्माण शुरू हो जाने या पूरा होने की घोषणा नहीं माना जा सकता। उपलब्ध विवरण में निविदा प्रक्रिया, कार्य शुरू करने की तारीख और निर्माण पूरा करने की समयसीमा का उल्लेख नहीं है। इन पहलुओं पर आगे मिलने वाली जानकारी से परियोजनाओं की प्रगति स्पष्ट होगी। फिलहाल सरकार ने निर्माण कार्यों को मंजूरी देकर योजना के अगले चरण की दिशा तय की है।
एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों और कस्बों के बाहर सड़क सुविधाएं विकसित करने का निर्णय मास्टर प्लान के संदर्भ में लिया गया है। इसके साथ पांच बाईपास परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक में शहरी भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य और हिसार बाईपास के संपर्क की जानकारी रखी। अब परियोजनाओं की लागत, विस्तृत मार्ग और निर्माण कार्यक्रम सामने आने पर योजना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। इसका घोषित लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े शहरी क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम करना है।





