हरियाणा

एक और बड़ा खुलासा: सिंघु बॉर्डर पर सरबजीत ही लेकर आया था लखबीर को, जानें कैसे बना निहंग

Gulabi
23 Oct 2021 1:34 PM GMT
एक और बड़ा खुलासा: सिंघु बॉर्डर पर सरबजीत ही लेकर आया था लखबीर को, जानें कैसे बना निहंग
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राजधानी दिल्‍ली और हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर पिछले दिनों हुई दलित युवक की निर्मम हत्‍या के मामले (Singhu Border Murder) के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है

राजधानी दिल्‍ली और हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर पिछले दिनों हुई दलित युवक की निर्मम हत्‍या के मामले (Singhu Border Murder) के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है. पंजाब पुलिस के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, सरबलोह धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी के आरोप में मारे गए लखबीर सिंह (Lakhbir Singh) को निहंग सरबजीत सिंह (Nihang Sarabjit Singh) ही धरना स्‍थल पर लेकर आया था.


इंडियन एक्सप्रेस को पंजाब पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि पंजाब के तरनतारन के रहने 35 वर्षीय मजदूर लखबीर सिंह को सरबजीत सिंह ही सिंघु बॉर्डर लाया था, क्‍योंकि दोनों एक दूसरे को पहले से जानते थे और निहंग सिख कथित तौर पर लखबीर के गांव चीमा कलां में अक्सर जाते थे.

बता दें कि हरियाणा क्राइम ब्रांच और सोनीपत पुलिस को युवक की निर्मम हत्‍या के मामले में सरबजीत सिंह के अलावा निहंग नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह की रिमांड मिली हुई है. वहीं, आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया था कि सरबजीत सिंह ने ही लखबीर का हाथ काटा था. इसके अलावा नारायण सिंह ने उसके पैर पर तीन वार किए थे और अन्‍य दो लोगों ने उसे किसान आंदोलन के पास बने मंच के नजदीक लगे बैरिकेड पर लटकाया था.

2017 में सरबजीत बना था निहंग

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सरबजीत पांच से छह साल की उम्र में गुरदासपुर के खुजाला गांव में अपने मामा के साथ रहने लगा था. जबकि उसके 75 वर्षीय पिता और 70 वर्षीय मां पास के विठवां गांव में रहते हैं. यही नहीं, वह दसवीं की पढ़ाई के बाद पैसा कमाने के लिए चार-पांच साल के लिए दुबई चला गया था. इस दौरान सरबजीत के मामा ने अपना निवास बटाला में सुखमनी कॉलोनी में स्थानांतरित कर लिया था, लेकिन दुबई से लौटने पर सरबजीत वहीं रहने लगा. इसके अलावा सरबजीत ने 2007 में एक महिला से शादी की, लेकिन 2017 में तलाक हो गया. पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि वह उसी साल नांदेड़ में हजूर साहिब गया और निहंग बन गया.

इसके अलावा पुलिस अधिकारी ने बताया कि सरबजीत करीब दो चाल पहले अपने चाचा के बेटे की शादी में शामिल होने के लिए बटाला आया था. जानकारी में मुताबिक, सरबजीत का एक 45 वर्षीय भाई भी है, जो "विक्षिप्त" है और विथवान में रहता है. इसके अलावा उसकी तीन बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है.

सरबजीत ने हाथ काटा, नारायण सिंह ने पैर और…

इससे पहले शनिवार (16 अक्‍टूबर) को सोनीपत कोर्ट में पेश किए निहंग सरबजीत सिंह ने कहा था कि लखबीर सिंह की हत्या में आठ लोग शामिल थे, जिनमें से वह तीन लोगों के नाम जानता है. जबकि बाकी को चेहरे से पहचानता है. वहीं, इसके अगले दिन (रविवार ) को कोर्ट में नारायण सिंह ने कहा कि लखबीर की हत्या में वे चार लोग शामिल थे. सरबजीत सिंह ने उसका हाथ काटा था और मैंने तीन वार पैर पर किए थे. इसके बाद भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह ने मिलकर उसे रस्सियों से बांधकर बैरिकेड्स पर लटकाया था. साथ ही नारायण ने कहा कि लखबीर करीब 45 मिनट तक तड़पता रहा था, इसके बाद उसकी मौत हुई थी. उसकी हत्या में हमारे अलावा अन्य कोई शामिल नहीं है. वहीं, नारायण सिंह ने कहा कि मुझे कोई पछतावा नहीं है, क्‍योंकि लखबीर सिंह ने सरबलोह ग्रंथ की बेअदबी की थी और उसे 200-400 लोगों ने पवित्र पुस्तक की दो प्रतियां लेकर भागते देखा गया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ ये बड़ा खुलासा

वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, युवक पर धारदार हथियार से हमला किया गया था. उसका एक हाथ कलाई से काटा गया है और गर्दन के साथ ही शरीर पर 10 से ज्यादा चोट के निशान मिले थे. वहीं, उसका एक पैर भी काटा गया था, लेकिन वह शरीर से अलग नहीं हो सका. जबकि रिपोर्ट में मौत का कारण चोट और ज्यादा खून बहना बताया गया. इसके अलावा युवक के शरीर पर रगड़ने के निशान भी मिले थे.
क्या है सरबलोह ग्रंथ ?
वैसे इस हत्‍या के पीछे सरबलोह ग्रंथ की बेअदबी का मामला बताया जा रहा है. वैसे सरबलोह ग्रंथ का शाब्दिक रूप से अर्थ 'सर्वव्यापी धर्मग्रंथ' है, लेकिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब के विपरीत सरबलोह ग्रंथ कुछ हिस्सों को छोड़कर मुख्यधारा के सिख समुदाय द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है. हालांकि निहंग इसे उच्च सम्मान में रखते हैं.
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