
Haryana: पदक जीतने की होड़ में प्रतिबंधित दवाओं और स्टेरॉयड के इस्तेमाल का मामला भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने जुलाई 2026 में जारी अस्थायी निलंबित सूची में 77 खिलाड़ियों और 2 कोचों को शामिल किया है। डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद इन सभी पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है।
नाडा की कार्रवाई के बाद खेल जगत में हलचल मच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम समय में बेहतर प्रदर्शन और सफलता हासिल करने की चाह में कुछ खिलाड़ी प्रतिबंधित पदार्थों का सहारा ले रहे हैं, जिससे न सिर्फ उनका करियर खतरे में पड़ रहा है, बल्कि भारतीय खेलों की छवि पर भी असर पड़ता है।
जारी सूची के अनुसार, डोपिंग के सबसे ज्यादा मामले एथलेटिक्स से सामने आए हैं। इसमें 24 खिलाड़ी और 2 कोच शामिल हैं। यानी एथलेटिक्स से जुड़े कुल 26 लोग डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके अलावा अन्य खेलों के खिलाड़ियों पर भी नाडा ने कार्रवाई की है।
डोपिंग का मतलब खेल प्रदर्शन बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित दवाओं या पदार्थों का इस्तेमाल करना है। ऐसे पदार्थ शरीर की क्षमता को अस्थायी रूप से बढ़ा सकते हैं, लेकिन इनके गंभीर स्वास्थ्य नुकसान भी हो सकते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खेल संस्थाएं डोपिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाती हैं।
खेल विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार खिलाड़ी जल्दी सफलता पाने और प्रतियोगिताओं में बढ़त हासिल करने के लिए गलत रास्ता अपना लेते हैं। खासकर युवा खिलाड़ी बिना पूरी जानकारी के कुछ प्रतिबंधित सप्लीमेंट या दवाओं का सेवन कर लेते हैं, जिसका परिणाम उन्हें निलंबन और करियर पर संकट के रूप में भुगतना पड़ता है।
नाडा लगातार खिलाड़ियों के बीच जागरूकता अभियान चलाता है, ताकि उन्हें प्रतिबंधित पदार्थों और डोपिंग नियमों की जानकारी दी जा सके। एजेंसी का उद्देश्य खेलों में निष्पक्षता बनाए रखना और साफ-सुथरे प्रदर्शन को बढ़ावा देना है।
अस्थायी निलंबन के बाद खिलाड़ियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित प्रक्रिया पूरी करने का मौका दिया जाता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो खिलाड़ियों पर लंबी अवधि का प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। इससे उनके अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के करियर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोपिंग की समस्या को रोकने के लिए केवल खिलाड़ियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षकों, सपोर्ट स्टाफ और खेल संस्थानों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण, पोषण और वैज्ञानिक तरीके से फिटनेस तैयार करने पर जोर देना होगा।
भारतीय खेलों में पिछले कुछ वर्षों में प्रदर्शन बेहतर हुआ है और खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। ऐसे समय में डोपिंग जैसी घटनाएं खेल व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा करती हैं। नाडा की ताजा कार्रवाई यह संदेश देती है कि खेलों में अनुचित तरीकों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि असली सफलता मेहनत, अनुशासन और सही प्रशिक्षण से हासिल की जा सकती है। खिलाड़ियों को पदक के लिए गलत तरीकों का सहारा लेने के बजाय लंबे समय के करियर और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।





