हरियाणा

सरकारी सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ का आरोप

Kavita2
27 Sept 2026 1:57 PM IST
सरकारी सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ का आरोप
x

यमुनानगर। आबकारी एवं कराधान विभाग के सरकारी सॉफ्टवेयर से कथित तौर पर छेड़छाड़ कर 21 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जीवाड़ा किए जाने के मामले में विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार को विभागीय टीम ने दो फर्मों से जुड़े छह शराब ठेकों को सील कर दिया। इसके साथ ही संबंधित पक्षों को राशि की रिकवरी के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।

विभाग की कार्रवाई के तहत जगाधरी बस स्टैंड, अग्रसेन चौक और खजुरी रोड सहित छह स्थानों पर संचालित शराब ठेकों पर सील लगाई गई। यह कार्रवाई आबकारी विभाग के कलेक्टर की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है। जांच में फर्जी जीआरएन नंबरों के आधार पर परमिट जारी किए जाने का मामला सामने आया था।

आबकारी विभाग के कलेक्टर की जांच में दावा किया गया कि एक्सएस लिकर की एल-13 और एल-1 फर्म को 103 कथित फर्जी जीआरएन नंबरों के आधार पर परमिट जारी किए गए। इसके कारण सरकार को करीब 12 करोड़ 36 लाख रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान का आरोप है।

इसी तरह महेंद्र सिंह एंड संस से जुड़े मामले में 65 जीआरएन नंबरों के माध्यम से परमिट जारी किए जाने की बात जांच में सामने आई। इससे सरकार को 8 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक के नुकसान का दावा किया गया है।

दोनों मामलों की राशि को मिलाया जाए तो कथित राजस्व नुकसान 21 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचता है। इतनी बड़ी रकम से जुड़ा मामला सामने आने के बाद आबकारी एवं कराधान विभाग ने रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करते हुए संबंधित ठेकों के खिलाफ कार्रवाई की है।

मामले में सरकारी सॉफ्टवेयर और जीआरएन नंबरों की भूमिका जांच का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि कथित फर्जी जीआरएन नंबरों के आधार पर परमिट जारी करने की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और सरकारी व्यवस्था में यह गड़बड़ी किस स्तर पर हुई।

जीआरएन नंबर सरकारी राजस्व से जुड़ी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में कथित तौर पर फर्जी नंबरों के जरिए परमिट जारी होना विभागीय व्यवस्था और सॉफ्टवेयर की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

जांच में एक्सएस लिकर की एल-13 और एल-1 फर्म के मामले में 103 जीआरएन नंबरों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन नंबरों के आधार पर परमिट जारी किए जाने से सरकारी राजस्व को 12 करोड़ 36 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

दूसरे मामले में महेंद्र सिंह एंड संस से जुड़े 65 जीआरएन नंबर जांच के दायरे में आए हैं। इन नंबरों से जारी परमिट के कारण 8 करोड़ 93 लाख रुपये से ज्यादा का राजस्व नुकसान होने की बात कही गई है।

मामला सामने आने के बाद विभाग ने केवल जांच तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। शुक्रवार को विभागीय टीम अलग-अलग स्थानों पर पहुंची और दो फर्मों से संबंधित छह ठेकों को सील कर दिया।

जगाधरी बस स्टैंड स्थित ठेके पर भी विभाग की टीम पहुंची और कार्रवाई करते हुए सील लगाई। इसके अलावा अग्रसेन चौक और खजुरी रोड सहित अन्य स्थानों पर भी ठेकों को सील किया गया। कार्रवाई के दौरान संबंधित ठेकों पर कारोबार रोक दिया गया।

इसके साथ ही विभाग की ओर से रिकवरी नोटिस जारी किए गए हैं। इसका उद्देश्य जांच में सामने आई कथित राजस्व हानि की राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाना है।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि आरोप सीधे सरकारी सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ और परमिट जारी करने की प्रक्रिया में अनियमितता से जुड़े हैं। यदि सरकारी डिजिटल व्यवस्था में छेड़छाड़ हुई है तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सॉफ्टवेयर तक पहुंच किसके पास थी और कथित गड़बड़ी किस तरह की गई।

जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि 103 और 65 जीआरएन नंबर किस तरह तैयार हुए और इनके आधार पर परमिट कैसे जारी हो गए। परमिट जारी करने की प्रक्रिया में किन स्तरों पर सत्यापन किया जाता था और वहां कथित अनियमितता पकड़ में क्यों नहीं आई, यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।

आबकारी एवं कराधान विभाग के लिए राजस्व संग्रह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शराब कारोबार से जुड़े परमिट और अन्य प्रक्रियाओं में शुल्क तथा कर की राशि सरकारी राजस्व में जाती है। ऐसे में इस व्यवस्था में कथित फर्जीवाड़ा सीधे सरकारी राजस्व को प्रभावित करता है।

कलेक्टर की जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार दोनों फर्मों से जुड़े मामलों में नुकसान की राशि 21 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इसके बाद विभाग ने संबंधित ठेकों को सील करने और रिकवरी नोटिस जारी करने की कार्रवाई शुरू की।

फिलहाल छह ठेकों पर सील लगाए जाने के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। विभाग की जांच में यदि अन्य जीआरएन नंबर या परमिट संदिग्ध पाए जाते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

सरकारी सॉफ्टवेयर से कथित छेड़छाड़ का मामला होने के कारण तकनीकी स्तर पर भी जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि व्यवस्था में किसी तकनीकी खामी का फायदा उठाया गया या अधिकृत पहुंच का कथित दुरुपयोग हुआ।

विभाग के सामने अब कथित नुकसान की रिकवरी के साथ पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है। यह भी पता लगाया जाना बाकी है कि परमिट जारी करने की प्रक्रिया में किसी विभागीय कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका रही या नहीं।

फिलहाल कलेक्टर की जांच के आधार पर दो फर्मों से जुड़े मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है। शुक्रवार को छह ठेकों को सील करने के साथ रिकवरी नोटिस दिए गए हैं।

एक्सएस लिकर से जुड़े मामले में 103 कथित फर्जी जीआरएन नंबरों से करीब 12.36 करोड़ रुपये और महेंद्र सिंह एंड संस के मामले में 65 जीआरएन नंबरों से 8.93 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान का आरोप है।

मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा। फिलहाल आबकारी एवं कराधान विभाग ने छह ठेकों को सील कर रिकवरी की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।

Next Story