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Haryana हरियाणा में हर साल आने वाले प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों की व्यवस्थित गिनती करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, खासकर नवंबर और दिसंबर में उनके आने के मुख्य मौसम के दौरान, हरियाणा वन और वन्यजीव विभाग राज्य भर में चुनिंदा जगहों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-सक्षम कैमरे लगाने की योजना बना रहा है। इस पहल का मकसद राज्य में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या और विविधता की अधिक सटीक जानकारी हासिल करना है। प्रस्तावित कैमरा नेटवर्क में पक्षियों के संभावित आवास शामिल होंगे, जिनमें अधिसूचित आर्द्रभूमि (वेटलैंड) और अन्य जल निकाय शामिल हैं जहाँ प्रवासी पक्षियों के आने की जानकारी है।
अधिकारियों के अनुसार, हर साल लगभग 200 प्रजातियों के पक्षी हरियाणा आते हैं, जिनमें लगभग 100 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। प्रवासी पक्षियों के लिए राज्य का विशेष महत्व है क्योंकि यह सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर स्थित है, जो पक्षियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रमुख वैश्विक मार्गों में से एक है। मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. नवदीप सिंह ने कहा, "AI-सक्षम सिस्टम से विभाग को पक्षियों की पहचान करने और उन्हें अधिक कुशलता से रिकॉर्ड करने में मदद मिलने की उम्मीद है, साथ ही मैन्युअल गिनती पर निर्भरता भी कम होगी। यह तकनीक अलग-अलग जगहों पर पक्षियों की गतिविधियों की तस्वीरें लेने और उन पर नज़र रखने में मदद करेगी, जिससे भविष्य की संरक्षण योजना के लिए मूल्यवान डेटा मिलेगा।"
उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से विभाग को प्रवासी पक्षियों और उनकी मौसमी गतिविधियों पर डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, "हरियाणा प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, खासकर सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर इसकी स्थिति के कारण। हमारी कोशिश है कि तकनीक के साथ-साथ उन लोगों के ज्ञान और अनुभव का भी इस्तेमाल किया जाए जो नियमित रूप से इन पक्षियों को देखते हैं, ताकि उनकी संख्या, प्रजातियों की विविधता और गतिविधियों के पैटर्न को अधिक सटीक रूप से समझा जा सके।"
सिंह ने बताया कि गुरुग्राम के सुल्तानपुर नेशनल पार्क और यमुनानगर के कालेसर नेशनल पार्क में पहले ही AI-सक्षम कैमरे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि जल्द ही अन्य जगहों पर भी ऐसे कैमरे लगाए जाएंगे।" सिंह ने कहा कि पक्षी देखने वाले (बर्डवॉचर्स) सभी पक्षी आवासों में अपनी नियमित उपस्थिति और विभाग के साथ जुड़ाव के कारण पक्षी जीवन (एविफौना) के प्रबंधन में सहायक होते हैं।
उन्होंने आगे कहा, "विभाग ने 2 से 8 अक्टूबर तक 'कनेक्टिंग हैबिटेट, थ्राइविंग वाइल्डलाइफ' (आवास को जोड़ना, वन्यजीवों का फलना-फूलना) थीम पर वन्यजीव संरक्षण सप्ताह का आयोजन किया है। हमारा ध्यान वन्यजीव संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा में जनभागीदारी बढ़ाने पर है।"
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