एग्रीविज़न ने कृषि छात्रों की मांगों को लेकर कृषि मंत्री से की मुलाकात

हिसार: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एग्रीविज़न हरियाणा के प्रतिनिधिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध विषयों के विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों पर हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कृषि, कृषि अभियांत्रिकी, पशुपालन एवं मत्स्य विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, लंबित भर्तियों में तेजी लाने तथा भर्ती नियमों में विषयानुकूल योग्यता निर्धारित करने की मांग रखी।
ज्ञापन में कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एडीओ, एचडीओ, सीड वेरिफिकेशन ऑफिसर सहित रिक्त पदों को जल्द भरने तथा हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में टीए, एसटीए और अन्य तकनीकी पदों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की गई। इसके अलावा विद्यालयों में कक्षा 12वीं तक कृषि विषय और प्रशिक्षित कृषि शिक्षकों की व्यवस्था करने का आग्रह किया गया।
कृषि अभियांत्रिकी के विद्यार्थियों ने प्रदेश के सभी 20 विकास खंडों में एडीओ फार्म इम्प्लीमेंट्स के पद स्वीकृत करने और 3 अगस्त 2022 से लंबित 89 पदों के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की। साथ ही बीटेक एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग को संबंधित पदों के लिए मान्य शैक्षणिक योग्यता बनाने, कृषि अभियांत्रिकी का अलग निदेशालय स्थापित करने तथा कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों में आवश्यक पद स्वीकृत करने की मांग रखी गई।
पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान के क्षेत्र में लुवास के शोधार्थियों के वर्तमान 9 हजार रुपये मासिक वजीफे में बढ़ोतरी की मांग की गई। ज्ञापन में एमवीएससी शोधार्थियों के लिए 25 हजार और पीएचडी शोधार्थियों के लिए 30 हजार रुपये प्रतिमाह वजीफा निर्धारित करने अथवा इसके पुनरीक्षण के लिए समिति गठित करने का सुझाव दिया गया।
मत्स्य विज्ञान के विद्यार्थियों ने एफओ, डीएफओ, एफआरओ, डीडीएफ सहित संबंधित पदों की भर्ती नियमावली में संशोधन कर चार वर्षीय बीएफएससी डिग्री को अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता बनाने तथा चयन परीक्षाओं में मत्स्य विज्ञान विषय को उचित प्रमुखता देने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में एग्रीविज़न के प्रांत सह संयोजक रोहित बिश्नोई, डॉ. अरविंद, डॉ. पुलकित, ऋषिपाल और शिवम पांडेय सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए रोजगार और शैक्षणिक अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।





