विद्यार्थियों की अनोखी पहल, वेस्ट से बेस्ट बनाकर किया जागरूक

हिसार: लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) में दीपावली के अवसर पर ‘पुनः सृजनम्–दीपावली उत्सव’ थीम पर रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा के साथ भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम का आयोजन निदेशालय मानव संसाधन प्रबंधन के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) प्रकोष्ठ ने शुक्रवार को निदेशालय छात्र कल्याण के सहयोग से किया। इसका नेतृत्व मानव संसाधन प्रबंधन की निदेशिका डॉ. सोनिया सिंधु ने किया, जबकि आयोजन की संकल्पना, योजना एवं समन्वय में आईकेएस प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. अमन कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अनीश यादव तथा विशिष्ट अतिथि निदेशक छात्र कल्याण डॉ. संदीप कुमार गुप्ता उपस्थित रहे। डॉ. अनीश यादव ने विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा एवं नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का बेहतर माध्यम हैं। डॉ. संदीप कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को विभिन्न मंचों पर प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित किया।
प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय की 13 टीमों ने भाग लिया। इसकी विशेषता यह रही कि विद्यार्थियों ने रंगोली बनाने में पुनः उपयोग योग्य और अनुपयोगी सामग्रियों का रचनात्मक इस्तेमाल कर वेस्ट से बेस्ट की अवधारणा को साकार किया। रंगोलियों के माध्यम से दीपावली, भारतीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के संदेश दिए गए।
प्रतियोगिता में कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी की संजना एवं ज्योति की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस की नव्या एवं काजल की टीम द्वितीय तथा इसी महाविद्यालय की तमन्ना एवं रंजू की टीम तृतीय स्थान पर रही। कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. सुरभि, डॉ. पूनम रत्वान, डॉ. ज्योत्सना एवं डॉ. तेज प्रकाश ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, संसाधनों के पुनः उपयोग, पर्यावरणीय जागरूकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति चेतना विकसित करना था।





