
यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर में सामने आए करीब 70 करोड़ रुपये के चर्चित धान घोटाले के मुख्य आरोपित राइस मिलर संदीप कुमार सिंगला को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सोमवार को संदीप सिंगला की नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर ली। करीब 237 दिनों तक जेल में रहने के बाद अब वह जमानत पर बाहर आ सकेंगे।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुमित गोयल की अदालत में हुई, जहां बचाव पक्ष की दलीलों और मामले की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अदालत ने जमानत मंजूर कर दी। संदीप सिंगला को पुलिस ने 2 दिसंबर 2025 को राजस्थान से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने उससे करीब 18 दिनों तक रिमांड पर पूछताछ की थी।
जांच के दौरान एसआईटी के सामने कई अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। बताया गया कि पूछताछ में 30 से अधिक लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आई थी। हालांकि, 237 दिन बीतने के बाद भी मामले की जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाई है। अब तक इस मामले में केवल तीन आरोपितों की गिरफ्तारी हो सकी है।
एसआईटी प्रमुख और डीएसपी जगाधरी राजीव मिगलानी ने संदीप सिंगला को मिली जमानत की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। उन्होंने बताया कि फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है और जल्द ही अन्य गिरफ्तारियां की जाएंगी।
संदीप सिंगला के खिलाफ प्रतापनगर, व्यासपुर और छछरौली थानों में तीन अलग-अलग मामले दर्ज हैं। पुलिस जांच में सामने आया था कि उसके नियंत्रण में सात राइस मिलें संचालित हो रही थीं। इनमें पांच पुरानी और दो नई मिलें शामिल थीं। पुलिस ने संदीप सिंगला के साथ उसकी पत्नी रीतिका सिंगला के खिलाफ भी केस दर्ज किया था। हालांकि, मिलों की पावर ऑफ अटॉर्नी संदीप सिंगला के नाम होने के कारण रीतिका सिंगला को पहले ही राहत मिल चुकी थी।
जांच में एसआईटी को मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल, मंडी गेट पास, मिल आवंटन, स्टॉक सत्यापन और रिकॉर्ड में कई अनियमितताएं मिली थीं। आरोप है कि कम धान खरीद दिखाकर स्टॉक में हेराफेरी की गई और सरकारी धन का नुकसान पहुंचाया गया।
इस मामले का खुलासा 13 नवंबर 2025 को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह के नेतृत्व में हुई जांच के बाद हुआ था। इसके बाद विशेष जांच दल का गठन किया गया और पांच थाना प्रभारियों की टीम को जांच की जिम्मेदारी दी गई। जांच में फर्जी गेट पास, रिकॉर्ड में बदलाव और धान स्टॉक में भारी कमी जैसी गड़बड़ियां सामने आईं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार प्रतापनगर-खिजरी रोड स्थित एक परिसर में संचालित चार राइस मिलों के भौतिक सत्यापन में रिकॉर्ड की तुलना में 17,464.59 मीट्रिक टन धान कम पाया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब 42 करोड़ रुपये बताई गई। इसके अलावा बिजली खपत और वास्तविक धान प्रोसेसिंग के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर मिला।
रणजीतपुर और छछरौली क्षेत्र की अन्य राइस मिलों की जांच में भी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में विसंगतियां मिलीं। मार्केट फीस, बारदाना और अन्य खर्चों को जोड़ने के बाद कुल घोटाले की राशि 70 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई।
इस मामले में अब तक हैफेड के तत्कालीन सीनियर मैनेजर शैलेंद्र कुमार, परचेज मैनेजर अनिल कुमार और मिलर संदीप सिंगला की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है। इंस्पेक्टर मनोज यादव, सविता, विनोद कुमार और एएफएसओ देवेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
वहीं, प्रतापनगर में एक ही परिसर में चार राइस मिलों को लाइसेंस दिए जाने के मामले में अदालत पहले ही सख्त टिप्पणी कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि नियमों के अनुसार एक स्थान पर केवल एक लाइसेंस जारी किया जा सकता है। अदालत ने संबंधित विभागों को जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे।
अब संदीप सिंगला को जमानत मिलने के बाद इस मामले में जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। पुलिस का कहना है कि घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।





