हरियाणा

भिवानी में 356 जर्जर कक्षाएं, 238 पर सुरक्षा जांच बाकी

Kiran
2 Nov 2026 2:21 PM IST
भिवानी में 356 जर्जर कक्षाएं, 238 पर सुरक्षा जांच बाकी
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भिवानी जिले के 84 सरकारी स्कूलों में 356 कक्षाएँ जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पड़ी हैं, छात्रों की सुरक्षा जिला अधिकारियों के लिए एक बड़ी चिंता के रूप में उभरी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुल कमरों में से खराब स्थिति वाले 118 कक्षाओं को पहले ही कंडम घोषित किया जा चुका है, शेष 238 को औपचारिक रूप से असुरक्षित घोषित करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। जिला प्रशासन ने अब अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए ऐसे कमरों में पढ़ने वाले छात्रों को पास के स्कूलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।
पिछले दिनों उपायुक्त साहिल गुप्ता की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सरकारी स्कूलों के भवनों की हालत से जुड़ा मुद्दा उठा। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि बच्चों को असुरक्षित भवनों में पढ़ाई नहीं करायी जाये तथा चिह्नित कमरों को कंडम घोषित करने की प्रक्रिया अविलंब पूरी की जाये ताकि उनके स्थान पर नये भवनों का निर्माण किया जा सके.
बैठक में जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) शिव कुमार तंवर ने बताया कि 84 स्कूलों में 356 कमरे जर्जर हालत में हैं। उन्होंने कहा कि 118 कमरों को पहले ही कंडम घोषित किया जा चुका है, जबकि शेष 238 को कंडम घोषित करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि 43 नये कमरों के निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है.
गुप्ता ने संबंधित अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण दल गठित कर स्कूलों का दौरा करने और उनकी स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहां भी आवश्यक हो, उन्हें पास के स्कूलों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। बैठक में स्कूल परिसर में जलभराव की समस्या की भी समीक्षा की गई। तंवर ने कहा कि जिले के लगभग 66 स्कूल बरसात के दौरान जल जमाव से प्रभावित हुए, जबकि उनमें से 22 के परिसर में पानी घुस गया। डीसी ने अधिकारियों को जलभराव के प्रति संवेदनशील स्कूलों की पहचान करने और अगले मानसून से पहले सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्कूल के मैदानों को ऊपर उठाने और समतल करने के लिए, जहां भी आवश्यक हो, विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) वीबीजी-राम-जी योजना के तहत मिट्टी भरने के उपयोग का भी आह्वान किया।
डीसी ने कहा कि अगले मानसून से पहले पर्याप्त समय उपलब्ध है और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जलभराव को रोकने के लिए पहले से ही इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने देखा कि स्कूल परिसर में पानी जमा होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है और इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक कमियों के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
डीसी ने छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए अधिकारियों को स्कूल भवनों के ऊपर से गुजरने वाले हाई-टेंशन बिजली तारों को हटाने का भी निर्देश दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो, उचित नमूने के माध्यम से सभी स्कूलों में पीने के पानी का परीक्षण करने का आदेश दिया।
स्कूल के बुनियादी ढांचे में सुधार पर सरकार के फोकस का जिक्र करते हुए गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने व्यक्तिगत रूप से सरकारी स्कूलों की स्थिति की समीक्षा की और उनके सुधार के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को इन निर्देशों को लागू करने में लापरवाही के प्रति आगाह किया।
बुनियादी ढांचे से संबंधित मुद्दों के अलावा, डीसी ने समग्र शिक्षा कार्यक्रम के तहत की जा रही गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से छात्रों के लिए सुरक्षा शिविर आयोजित करने, किचन गार्डन और विज्ञान प्रदर्शनी विकसित करने, युवा इको-क्लब स्थापित करने और स्मार्ट कक्षा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कहा। उन्होंने छात्रों को विभिन्न करियर अवसरों से परिचित कराने के लिए प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों और बैंकों में शैक्षणिक दौरे का भी आह्वान किया।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त दीपक बाबूलाल करवा, सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी सोमबीर कादयान, जिला शिक्षा अधिकारी निर्मल दहिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी विनय जिंदल और सीएमजीजीए सांभवी उपस्थित थे।
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