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हरियाणा रोडवेज हड़ताल से 259 बसें प्रभावित, यात्री परेशान
Rajeshwari Nishad
1 Nov 2026 6:14 PM IST

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हरियाणा: हरियाणा में रोडवेज कर्मचारियों का अपनी लंबित मांगों को लेकर गुस्सा फूट पड़ा है। सिरसा से लेकर हिसार और हांसी तक बस सेवाओं पर आंदोलन का असर दिखाई देने लगा है। खासकर हिसार और हांसी में कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सरकारी बसों के पहिए थम गए हैं। बसों का संचालन प्रभावित होने से हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बस स्टैंड पर लोग घंटों तक बसों का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, निजी बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग रहा है।
हिसार डिपो में कर्मचारियों ने 31 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू किया था। एक नवंबर को भी हड़ताल दूसरे दिन जारी रही। प्रशासन और कर्मचारी नेताओं के बीच बातचीत के तीन दौर होने के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी लंबित मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
हिसार और हांसी डिपो की बसों के पहिए थमे
रोडवेज कर्मचारियों के आंदोलन का सबसे ज्यादा असर हिसार और हांसी डिपो में देखने को मिल रहा है। यहां कर्मचारियों ने बसों का संचालन रोक दिया है। हिसार डिपो की करीब 181 और हांसी सब-डिपो की 78 बसों के संचालन पर असर पड़ा है। इस तरह लगभग 259 बसें प्रभावित हुई हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर सहित कई लंबे और स्थानीय रूटों पर यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
शुक्रवार रात से ही कर्मचारियों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया था। शनिवार सुबह डिपो से बसों को बाहर निकलने से रोक दिया गया। चंडीगढ़ जाने वाली पहली बस भी रवाना नहीं हो सकी। इसके बाद अन्य रूटों पर भी सरकारी बसों का संचालन प्रभावित हुआ।
लंबित भत्तों के भुगतान को लेकर नाराजगी
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में रात्रि भत्ता, यात्रा भत्ता (टीए), ओवरटाइम, एलटीसी और मेडिकल बिलों का भुगतान शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनके वित्तीय लाभ लंबित हैं। कई बार अधिकारियों के सामने मांगें उठाई गईं और आश्वासन भी मिले, लेकिन भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती गई।
कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, वे पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनके खातों में लंबित राशि नहीं पहुंचती और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन और यूनियन के बीच बातचीत बेनतीजा
हड़ताल समाप्त कराने के लिए रोडवेज प्रशासन और कर्मचारी नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हुई। हिसार डिपो के महाप्रबंधक राहुल मित्तल और एसडीएम ज्योति मित्तल ने कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर बसों का संचालन दोबारा शुरू कराने का प्रयास किया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि टीए और अप्रेंटिस कर्मचारियों के वेतन से संबंधित कुछ भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। वहीं, एलटीसी की राशि का भुगतान भी जल्द होने की संभावना जताई गई।
हालांकि, कर्मचारी नेताओं ने इन आश्वासनों को पर्याप्त नहीं माना। उनका कहना है कि केवल भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने से समस्या हल नहीं होगी। जब तक बकाया राशि उनके बैंक खातों में जमा नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। एक नवंबर को भी तीन दौर की बातचीत के बाद सहमति नहीं बन पाई।
निजी बसों में बढ़ी भीड़, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
सरकारी बसों का संचालन प्रभावित होने से यात्रियों को निजी और सहकारी परिवहन की बसों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। निजी बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण कई रूटों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
कई यात्रियों को बस स्टैंड पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ लोगों को मजबूरी में निजी वाहनों और टैक्सी का सहारा लेना पड़ रहा है। रोजाना नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में आने-जाने वाले लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हुई है।
हिसार और हांसी से दिल्ली, चंडीगढ़ और जयपुर जाने वाले यात्रियों के सामने विशेष परेशानी है। दूसरे डिपो की बसें और निजी बसें उपलब्ध होने के बावजूद यात्रियों की संख्या के मुकाबले परिवहन के साधन कम पड़ रहे हैं।
सिरसा के यात्रियों पर भी असर
हिसार और हांसी में बसों का संचालन ठप होने का असर आसपास के रूटों पर भी दिखाई दे रहा है। सिरसा सहित दूसरे क्षेत्रों के यात्रियों को भी बसों की उपलब्धता और समय-सारिणी में बदलाव के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, सिरसा डिपो में भी उसी स्तर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
5 और 6 नवंबर को प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान
रोडवेज कर्मचारियों का आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक हो सकता है। हरियाणा रोडवेज सांझा मोर्चा और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने 5 और 6 नवंबर को प्रदेशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस आंदोलन में प्रदेश के 24 डिपो और 13 सब-डिपो के करीब 20 हजार कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
कर्मचारी संगठनों ने लंबित वित्तीय लाभों के साथ-साथ वेतनमान में सुधार, दिवाली बोनस, अर्जित अवकाश की बहाली, रात्रि भत्ते और ओवरटाइम भुगतान जैसी मांगें भी उठाई हैं। इसके अलावा विभाग के निजीकरण का विरोध भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
परिवहन व्यवस्था सामान्य करना प्रशासन के लिए चुनौती
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल ने हरियाणा की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को रोजाना आवागमन में परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। प्रशासन की कोशिश है कि बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाला जाए और बसों का संचालन सामान्य किया जा सके।
फिलहाल हिसार और हांसी में हड़ताल जारी रहने से यात्रियों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। यदि जल्द ही कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच सहमति नहीं बनी तो 5 और 6 नवंबर को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी हड़ताल से राज्य के अन्य जिलों में भी बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कर्मचारियों की मांगों और यात्रियों की सुविधा के बीच समाधान कब निकलेगा।
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