हरियाणा
सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण में 18 साल की देरी, हाईकोर्ट में मामला
Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 10:36 PM IST

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हरियाणा। हरियाणा में शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकारी योजनाओं की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां लोगों से बाहरी विकास शुल्क यानी एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) के नाम पर करोड़ों रुपये जमा कराए जाने के बावजूद सड़क और जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सेक्टर रोड के निर्माण के लिए वर्ष 2008 में शुरू की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया 18 साल बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। इस देरी से प्रभावित लोगों को आवागमन और अन्य सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हरियाणा में शहरी विस्तार के लिए विकसित किए गए सेक्टरों और आवासीय क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण महत्वपूर्ण माना जाता है। इन सड़कों के माध्यम से आवासीय कॉलोनियों को मुख्य मार्गों, बाजारों और अन्य क्षेत्रों से जोड़ा जाता है। लेकिन संबंधित मामले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने के कारण प्रस्तावित सेक्टर रोड का निर्माण अधूरा है। इससे विकास शुल्क के बदले मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
2008 में शुरू हुई थी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित सेक्टर रोड के निर्माण के लिए वर्ष 2008 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी।इसका उद्देश्य सड़क निर्माण के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराना था, ताकि प्रस्तावित मार्ग को विकसित किया जा सके।लेकिन 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपने निर्धारित उद्देश्य तक नहीं पहुंच सकी है।इस दौरान शहरी क्षेत्रों में आबादी और यातायात का दबाव बढ़ता रहा, जबकि प्रस्तावित सड़क का निर्माण आगे नहीं बढ़ पाया।हालांकि, संबंधित भूमि का कुल क्षेत्रफल, अधिग्रहण की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति और निर्माण में आई विशिष्ट बाधाओं का विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।
करोड़ों रुपये जमा, फिर भी सुविधाओं का इंतजार
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बाहरी विकास शुल्क के उपयोग को लेकर उठ रहा है।शहरी विकास के लिए निर्धारित ईडीसी के माध्यम से सड़कों, जलापूर्ति, सीवरेज और अन्य बाहरी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण की व्यवस्था की जाती है।लेकिन संबंधित क्षेत्र में करोड़ों रुपये का विकास शुल्क जमा किए जाने के बावजूद सड़क जैसी आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।
इस स्थिति में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि जमा की गई धनराशि के बदले निर्धारित सुविधाओं को विकसित करने में इतनी देरी क्यों हुई।हालांकि, इस विशेष परियोजना में वसूली गई कुल राशि और उसका वास्तविक उपयोग कितनी योजनाओं में हुआ है, इसकी पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती।आखिर क्या होता है बाहरी विकास शुल्क?एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज यानी ईडीसी शहरी विकास से संबंधित शुल्क है।
हरियाणा में लाइसेंस प्राप्त आवासीय और अन्य परियोजनाओं के विकास के दौरान नियमानुसार यह शुल्क लिया जाता है।इसका उद्देश्य परियोजना के बाहर आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराना होता है।इन सुविधाओं में मुख्य सड़कों और परिवहन संपर्क के अलावा जलापूर्ति, सीवरेज तथा अन्य विकास कार्य शामिल हो सकते हैं।
वर्ष 2026-27 के हरियाणा बजट में भी ईडीसी से विकास कार्यों के लिए 4,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया था। इससे स्पष्ट है कि शहरी बुनियादी ढांचे के लिए यह शुल्क महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत है।
सेक्टर रोड नहीं बनने से बढ़ती हैं परेशानियां
किसी भी विकसित आवासीय क्षेत्र में सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि पूरी शहरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।सड़कों के माध्यम से लोगों को अस्पताल, स्कूल, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच मिलती है।यदि निर्धारित सेक्टर रोड का निर्माण नहीं होता, तो निवासियों को दूसरे मार्गों का उपयोग करना पड़ सकता है।
इससे मुख्य रास्तों पर यातायात का दबाव बढ़ने और लोगों को लंबी दूरी तय करने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।हालांकि, इस विशेष परियोजना से कितने परिवार प्रभावित हैं और उन्हें कितनी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, इसका आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।गुरुग्राम में भी सामने आई है सड़कों की समस्याहरियाणा के गुरुग्राम में भी विकसित आवासीय क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क की कमी का मुद्दा सामने आ चुका है।
सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम-मानेसर शहरी क्षेत्र के सेक्टर 58 से 115 के बीच प्रस्तावित 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए लगभग 1,158 एकड़ अधिग्रहित न हुई जमीन का अधिग्रहण करने की योजना सामने आई थी।रिपोर्ट में बताया गया था कि कई आवासीय क्षेत्र विकसित होने के बावजूद उनके बीच निर्धारित सड़क नेटवर्क पूरा नहीं हो पाया है।हालांकि, इस गुरुग्राम योजना को वर्ष 2008 में शुरू हुए वर्तमान भूमि अधिग्रहण मामले के समान मानने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जमीन अधिग्रहण में देरी क्यों बनी चुनौती?
सड़क परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भूमि की उपलब्धता आवश्यक होती है।यदि प्रस्तावित सड़क के रास्ते में आने वाली जमीन का अधिग्रहण पूरा नहीं होता, तो निर्माण कार्य प्रभावित हो सकता है।ऐसी परियोजनाओं में भूमि का स्वामित्व, मुआवजा, प्रशासनिक मंजूरी और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।हालांकि, संबंधित मामले में अधिग्रहण की प्रक्रिया 18 साल तक लंबित रहने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है।यह पता लगाना आवश्यक होगा कि प्रस्तावित सड़क के लिए कितनी जमीन की जरूरत थी और अब तक कितना हिस्सा अधिग्रहित किया जा चुका है।
विकास योजनाओं की जवाबदेही पर सवालशहरी विकास योजनाओं में लंबे समय तक देरी होने से सरकारी व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।जब विकास शुल्क जमा हो चुका हो, तो संबंधित सुविधाओं के निर्माण की स्थिति स्पष्ट होना भी जरूरी है।ऐसे मामलों में परियोजना की स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, निर्माण की समयसीमा और खर्च का विवरण महत्वपूर्ण होता है।यदि इन जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए, तो प्रभावित लोगों को समझने में आसानी होगी कि योजना किस स्तर पर लंबित है।इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से देरी का कारण और नई समयसीमा बताने वाला कोई पुष्ट आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है।
18 वर्षों की देरी से उठे कई सवाल
वर्ष 2008 से 2026 तक का समय किसी भी शहरी विकास परियोजना के लिए काफी लंबा है।इस दौरान शहरी क्षेत्रों की आवश्यकताएं बदलती रहती हैं। आबादी बढ़ने के साथ सड़कों की उपयोगिता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।यदि सड़क का निर्माण समय पर नहीं हो पाता, तो नियोजित शहरी विकास का उद्देश्य प्रभावित होता है।इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि परियोजना में देरी के कारणों की नियमित समीक्षा हुई थी या नहीं।विकास शुल्क की वसूली और उसके उपयोग का पारदर्शी विवरण ऐसे मामलों में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
अब लोगों को सड़क निर्माण का इंतजार
हरियाणा में सामने आए इस मामले ने शहरी विकास परियोजनाओं की समयबद्धता पर एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है।वर्ष 2008 में शुरू हुई सेक्टर रोड की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया 18 साल बाद भी पूरी नहीं होने की बात सामने आई है। दूसरी ओर करोड़ों रुपये का बाहरी विकास शुल्क जमा होने के बावजूद अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलने से विकास योजनाओं की स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह स्पष्ट होना है कि अधिग्रहण प्रक्रिया कब पूरी होगी और सड़क निर्माण की नई समयसीमा क्या निर्धारित की जाएगी।जब तक संबंधित विभाग की ओर से इन सवालों के जवाब सामने नहीं आते, तब तक प्रभावित लोगों के लिए सड़क और बुनियादी सुविधाओं का इंतजार बना रहेगा।
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