गुजरात

सखी मंडलों ने दिखाया दम पांच साल में 39 करोड़ से ज्यादा की बिक्री

Ratna Netam
5 Oct 2026 9:06 PM IST
सखी मंडलों ने दिखाया दम पांच साल में 39 करोड़ से ज्यादा की बिक्री
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गांधीनगर। गुजरात में स्वयं-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए आयोजित किए जाने वाले ‘SARAS मेले’ उनके लिए कारोबार का महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आए हैं। गुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कंपनी लिमिटेड (GLPC) के अनुसार, राज्य के ‘सखी मंडलों’ की महिलाओं ने पिछले पांच वर्षों में प्रदेशभर में आयोजित 236 SARAS मेलों के जरिए 39 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री की है।GLPC की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इन मेलों का उद्देश्य स्वयं-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना है। यहां महिलाएं अपने बनाए उत्पादों को प्रदर्शित करने के साथ सीधे उनकी बिक्री भी कर सकती हैं। इससे उन्हें स्थानीय बाजार के साथ बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलता है।पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि SARAS मेलों में स्वयं-सहायता समूहों की भागीदारी बड़े स्तर पर रही है। इस अवधि के दौरान गुजरात में कुल 236 मेलों का आयोजन किया गया। इनमें 8,500 से ज्यादा स्वयं-सहायता समूहों ने हिस्सा लिया और इन समूहों ने मिलकर 39.06 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री की।यह आंकड़ा बताता है कि सखी मंडलों की महिलाएं स्वयं तैयार किए गए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। SARAS मेले उनके लिए केवल सामान बेचने का स्थान नहीं हैं, बल्कि अपने काम और उत्पादों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
8,500 से ज्यादा समूहों की भागीदारी
पिछले पांच वर्षों में आयोजित 236 SARAS मेलों में 8,500 से अधिक स्वयं-सहायता समूहों की भागीदारी अपने आप में महत्वपूर्ण है। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली महिलाएं इन मेलों में अपने समूहों के माध्यम से तैयार उत्पादों के साथ शामिल हुईं।स्वयं-सहायता समूह महिलाओं को सामूहिक रूप से काम करने का अवसर देते हैं। महिलाएं समूह बनाकर विभिन्न उत्पाद तैयार करती हैं और उन्हें बेचकर आमदनी हासिल करती हैं। लेकिन छोटे स्तर पर काम करने वाली महिलाओं के सामने अक्सर सबसे बड़ी चुनौती अपने उत्पादों के लिए पर्याप्त बाजार तलाशने की होती है।SARAS मेले इसी अंतर को कम करने के लिए मंच उपलब्ध कराते हैं। यहां महिलाओं को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों के सामने रखने का अवसर मिलता है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और उत्पादों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की संभावना बनती है।
39.06 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री
GLPC के अनुसार, पांच वर्षों में इन मेलों के जरिए हुई कुल बिक्री 39.06 करोड़ रुपये से ज्यादा रही। यह बिक्री राज्यभर में आयोजित सभी 236 मेलों में भाग लेने वाले स्वयं-सहायता समूहों के संयुक्त कारोबार का आंकड़ा है।इससे यह भी पता चलता है कि छोटे स्तर पर काम करने वाले महिला समूह सामूहिक रूप से बड़ा कारोबार खड़ा कर सकते हैं। अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों में काम करने वाले समूहों को जब बाजार उपलब्ध होता है तो उनके उत्पादों की पहुंच भी बढ़ सकती है।इन मेलों के माध्यम से महिला समूहों को अपने उत्पादों के प्रति ग्राहकों की प्रतिक्रिया जानने का अवसर भी मिलता है। ग्राहक किस तरह के उत्पाद पसंद कर रहे हैं, डिजाइन या पैकेजिंग में क्या बदलाव किया जा सकता है और बाजार की मांग किस दिशा में बढ़ रही है, जैसी जानकारियां कारोबार को आगे बढ़ाने में उपयोगी हो सकती हैं।
महिलाओं को बड़े बाजार तक पहुंचाने का प्रयास
सखी मंडलों के सामने केवल उत्पादन करना ही चुनौती नहीं होता। तैयार सामान की मार्केटिंग और बिक्री भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। खासतौर पर ग्रामीण या छोटे क्षेत्रों में काम करने वाले समूहों के लिए बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुंचना आसान नहीं होता।ऐसी स्थिति में SARAS मेले महिलाओं और ग्राहकों के बीच सीधे संपर्क का माध्यम बनते हैं। मेले में आने वाले लोग विभिन्न स्वयं-सहायता समूहों के उत्पादों को एक ही स्थान पर देख और खरीद सकते हैं।इससे महिलाओं को अपने काम की पहचान बनाने का अवसर मिलता है। किसी उत्पाद को ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलने पर समूह भविष्य में उसके उत्पादन को बढ़ाने या उसमें बदलाव करने की योजना बना सकता है।
आर्थिक गतिविधियों में बढ़ रही भागीदारी
स्वयं-सहायता समूहों का मॉडल महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ता है। एक समूह में शामिल महिलाएं मिलकर उत्पादन और बिक्री की जिम्मेदारी संभाल सकती हैं। इससे व्यक्तिगत स्तर पर होने वाली कई परेशानियों को सामूहिक प्रयास के जरिए कम किया जा सकता है।गुजरात में सखी मंडलों की महिलाओं की SARAS मेलों में बड़ी भागीदारी यह दिखाती है कि स्वयं-सहायता समूह बाजार आधारित गतिविधियों में सक्रिय हैं। 8,500 से ज्यादा समूहों का इन आयोजनों में शामिल होना इस पहल के व्यापक दायरे को भी दर्शाता है।39 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री महिलाओं के उत्पादों के लिए उपलब्ध बाजार और ग्राहकों की मांग का संकेत देती है। हालांकि प्रत्येक समूह की बिक्री अलग-अलग हो सकती है, लेकिन कुल कारोबार का आंकड़ा इन मेलों के व्यावसायिक महत्व को सामने रखता है।
उत्पाद दिखाने से लेकर बेचने तक एक मंच
SARAS मेलों की खासियत यह है कि यहां स्वयं-सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने की सुविधा एक ही जगह मिलती है। इससे उन्हें अपने उत्पादों के प्रचार के लिए अलग व्यवस्था करने की आवश्यकता कम हो सकती है।इन मेलों में भागीदारी महिलाओं को दूसरे स्वयं-सहायता समूहों के काम को देखने और उनके अनुभवों को समझने का अवसर भी देती है। अलग-अलग क्षेत्रों के समूह एक जगह आने से नए विचारों और काम करने के तरीकों का आदान-प्रदान भी संभव होता है।साथ ही महिलाओं को यह समझने का अवसर मिलता है कि बड़े बाजार में ग्राहकों की पसंद क्या है और उनके उत्पादों को किस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
महिला उद्यमिता को मिल रहा बाजार
गुजरात में पिछले पांच वर्षों के दौरान 236 SARAS मेलों का आयोजन और उनमें 8,500 से अधिक स्वयं-सहायता समूहों की भागीदारी महिला उद्यमिता के विस्तार की तस्वीर पेश करती है। इन आयोजनों के जरिए 39.06 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री होना बताता है कि सखी मंडलों द्वारा तैयार उत्पाद बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं।इन मेलों ने महिलाओं को अपने उत्पाद दिखाने, सीधे ग्राहकों तक पहुंचने और कारोबार बढ़ाने का अवसर दिया है। छोटे स्तर से अपना काम शुरू करने वाली महिलाओं के लिए इस तरह के मंच बाजार तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।GLPC के आंकड़ों के मुताबिक, पांच वर्षों में हुई 39 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री ने SARAS मेलों को स्वयं-सहायता समूहों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्केटिंग और बिक्री मंच के रूप में सामने रखा है। इससे सखी मंडलों की महिलाओं को अपनी मेहनत को कारोबार में बदलने और बड़े बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
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