गुजरात

विश्व हिन्दू परिषद ने गुरु रविदास जयंती पर समाज में सद्भाव और धर्म के संदेश को किया उजागर

SHIDDHANT
1 Feb 2026 10:08 PM IST
विश्व हिन्दू परिषद ने गुरु रविदास जयंती पर समाज में सद्भाव और धर्म के संदेश को किया उजागर
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Gujarat गुजरात। विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने गुरु रविदास जयंती के अवसर पर कहा कि यह न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के हिंदुओं के लिए एक प्रमुख त्योहार है। उन्होंने बताया कि आज हम अपने गुरु, सार्वभौमिक शिक्षक और संतों में अग्रणी, गुरु रविदास को उनकी जयंती पर याद कर रहे हैं। आलोक कुमार ने कहा, “गुरु रविदास का जीवन और शिक्षाएँ हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करने का संदेश देती हैं, जो गुरु के सिद्धांतों और धर्मयुक्त कार्यों पर आधारित हो। उनके उपदेश हमें सामाजिक सद्भाव, समानता और मानवता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं।

विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष ने आगे कहा कि गुरु रविदास ने जाति और सामाजिक भेदभाव के बंधनों को तोड़ते हुए हर व्यक्ति को समान अधिकार और गरिमा प्रदान करने का संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी शिक्षाएँ आज भी हमारे समाज के लिए मार्गदर्शक हैं और हमें समाज में भाईचारा, आपसी सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करती हैं। इस अवसर पर VHP ने विभिन्न धर्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। मुख्य आयोजनों में भजन-संध्या, गुरु रविदास की शिक्षाओं पर व्याख्यान और सामुदायिक सेवा गतिविधियाँ शामिल थीं। आलोक
कुमार
ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल धार्मिक उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि समाज में गुरु रविदास के संदेश को वास्तविक रूप से लागू करना है।

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में गुरु के आदर्शों को अपनाना चाहिए, जिससे समाज में समानता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की भावना मजबूत हो। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे गुरु रविदास के विचारों और उनके शिक्षाओं को आगे बढ़ाएँ और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएँ। गुरु रविदास जयंती का यह पर्व न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में भाईचारे, सहिष्णुता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करता है। आलोक कुमार ने समस्त हिंदू समाज को इस पावन दिन की बधाई दी और कहा कि गुरु रविदास के आदर्श जीवन की मिसाल हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
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