
सूरत। गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत में कपड़ा और एम्ब्रॉयडरी उद्योग से जुड़े मजदूरों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। साप्ताहिक अवकाश, आठ घंटे की कार्य अवधि, समय पर वेतन और श्रम कानूनों के पालन की मांग को लेकर गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को बड़ी संख्या में श्रमिक जिला कलेक्टर कार्यालय के पास एकत्र हुए। मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे प्रतिदिन 12 घंटे काम कराया जाता है, लेकिन साप्ताहिक छुट्टी मांगने पर उन्हें गैरहाजिर दिखा दिया जाता है। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्टर कार्यालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने लगभग 60 से 80 मजदूरों और श्रमिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण यह कार्रवाई की गई।
सुबह 10 बजे कलेक्टर कार्यालय के बाहर जुटे मजदूर
गुरुवार सुबह करीब 10 बजे सूरत जिला कलेक्टर कार्यालय के आसपास कपड़ा उद्योग से जुड़े लगभग 100 मजदूर एकत्र हुए। इन मजदूरों का उद्देश्य प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखना और श्रमिक अधिकारों को लागू करने की मांग करना था।
कार्यालय के प्रवेश द्वार पर वर्दीधारी और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात थे। पुलिस के जवान आने-जाने वाले लोगों और प्रदर्शन के लिए पहुंच रहे मजदूरों पर नजर रख रहे थे।
मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि कपड़ा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से उनकी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई करने की मांग की।
साप्ताहिक छुट्टी मांगने पर गैरहाजिर दिखाने का आरोप
प्रदर्शन में शामिल मजदूरों की प्रमुख मांग साप्ताहिक छुट्टी की थी।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि कई फैक्ट्रियों में नियमित अवकाश नहीं दिया जाता। यदि कोई कर्मचारी रविवार या किसी अन्य दिन छुट्टी लेता है, तो मालिक उसे गैरहाजिर दर्ज कर देते हैं।
श्रमिकों ने कहा कि उन्हें लगातार लंबे समय तक काम करना पड़ता है। इससे उनके स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर असर पड़ रहा है।
कुछ मजदूरों ने आधार कार्ड और नौकरी से संबंधित दस्तावेजों को लेकर भी चिंता जताई। हालांकि, इन दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग या उन्हें जब्त किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मजदूरों का कहना है कि वे केवल अपने कानूनी अधिकार और बेहतर कार्य परिस्थितियां चाहते हैं।
12 घंटे काम, लेकिन आठ घंटे की ड्यूटी की मांग
सूरत के टेक्सटाइल और एम्ब्रॉयडरी उद्योग में कार्यरत मजदूर लंबे समय से कार्य अवधि कम करने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इकाइयों में उनसे प्रतिदिन 12 घंटे काम कराया जाता है। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त आराम और नियमित साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता।
मजदूर संगठनों की मांग है कि काम की अवधि आठ घंटे निर्धारित की जाए और इससे कर्मचारियों के मौजूदा वेतन में कोई कटौती नहीं हो।
उनका कहना है कि लंबे समय तक लगातार काम करने से शारीरिक थकान बढ़ती है और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर भी नहीं मिल पाता।
सितंबर में हुए प्रदर्शन के दौरान भी श्रमिकों ने आठ घंटे की ड्यूटी और साप्ताहिक छुट्टी की मांग उठाई थी।
पुलिस ने कई मजदूरों और यूनियन नेताओं को हिरासत में लिया
गुरुवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कलेक्टर कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। इसके अलावा आयोजन से संबंधित निर्धारित शर्तों का भी पालन नहीं किया गया था।
सूरत शहर के पुलिस उपायुक्त राजेश परमार ने बताया कि कलेक्टर कार्यालय से करीब 100 मीटर दूर 60 से 70 लोगों को हिरासत में लिया गया।
अन्य रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए मजदूरों और श्रमिक नेताओं की संख्या लगभग 80 बताई गई है।
गुजरात इंटक अध्यक्ष नैषध देसाई को भी हिरासत में लेकर उमरा पुलिस थाने ले जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों को ले जाने के लिए पुलिस की बसों और अन्य वाहनों की व्यवस्था की गई थी।
श्रमिक संगठनों ने उठाई वेतन और पीएफ की मांग
मजदूरों की मांग केवल कार्य अवधि और साप्ताहिक छुट्टी तक सीमित नहीं है।
श्रमिक संगठनों ने समय पर वेतन भुगतान, भविष्य निधि यानी पीएफ, कर्मचारी राज्य बीमा और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि उद्योगों में कार्यरत पात्र मजदूरों को कानून के अनुसार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
इसके अलावा हर महीने निर्धारित समय पर वेतन देने और अवकाश संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
मजदूर संगठनों ने प्रशासन से श्रम कानूनों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों की जांच कराने का आग्रह किया है।
श्रम विभाग पहले ही जारी कर चुका है निर्देश
सूरत में मजदूरों की समस्याओं को देखते हुए श्रम विभाग ने पहले भी कपड़ा और एम्ब्रॉयडरी उद्योग से जुड़े संगठनों को निर्देश जारी किए थे।
सितंबर के अंत में उप श्रम आयुक्त कार्यालय ने टेक्सटाइल एम्ब्रॉयडरी जॉबवर्क एसोसिएशन ऑफ सूरत (TEJAS) को लागू श्रम संहिताओं का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा था।
इसमें वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
श्रम विभाग ने एसोसिएशन से अपने सदस्य प्रतिष्ठानों को संबंधित नियमों की जानकारी देने तथा अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा था।
इसके बावजूद मजदूर संगठनों का आरोप है कि कई इकाइयों में उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ है।
अगस्त से जारी है मजदूरों और उद्योग संचालकों के बीच विवाद
सूरत के एम्ब्रॉयडरी उद्योग में श्रमिकों और फैक्ट्री संचालकों के बीच यह विवाद नया नहीं है।
16 अगस्त को अमरोली इलाके में सैकड़ों मजदूरों ने साप्ताहिक छुट्टी, त्योहारों के अवकाश और बोनस की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।
उस दौरान कुछ औद्योगिक इकाइयों में कामकाज प्रभावित हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और श्रमिकों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई थीं।
इसके बाद उद्योग संगठनों और प्रशासन के बीच बातचीत हुई थी।
अगस्त के अंत में कुछ एम्ब्रॉयडरी इकाइयों ने अवकाश के दिन काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान देने सहित कुछ मांगों पर सहमति जताई थी।
हालांकि, मजदूरों का कहना है कि सभी इकाइयों में इन व्यवस्थाओं का समान रूप से पालन नहीं किया जा रहा है।
प्रवासी मजदूरों की समस्याएं भी चर्चा में
सूरत का कपड़ा उद्योग बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और अन्य राज्यों से आए मजदूर यहां विभिन्न कारखानों तथा एम्ब्रॉयडरी इकाइयों में काम करते हैं।
इन श्रमिकों के लिए नियमित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और पर्याप्त आराम की व्यवस्था विशेष महत्व रखती है।
मजदूर संगठनों का कहना है कि उद्योग की उत्पादन क्षमता बनाए रखने के साथ कर्मचारियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा भी जरूरी है।
दूसरी ओर, उद्योग संचालकों के सामने उत्पादन, लागत और कार्य संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी हैं।
ऐसे में प्रशासन, उद्योग प्रतिनिधियों और श्रमिक संगठनों के बीच बातचीत से ही स्थायी समाधान निकालने की आवश्यकता है।
मजदूरों की मांगों पर प्रशासन के अगले कदम का इंतजार
सूरत में गुरुवार को हुई पुलिस कार्रवाई के बाद कपड़ा मजदूरों की समस्याएं एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।
श्रमिकों ने आठ घंटे की कार्य अवधि, साप्ताहिक छुट्टी और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।
वहीं पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन किए जाने का हवाला देकर मजदूरों को हिरासत में लिया।
अब श्रमिक संगठनों की नजर प्रशासन और श्रम विभाग के अगले कदम पर है। मजदूरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे।





