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Surat सूरत। भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पूरा हो गया है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर सूरत के टेक्सटाइल कारोबारियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब सूरत में इस समझौते को उद्योग के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण जो नुकसान उद्योग को झेलना पड़ रहा था, वह न सिर्फ इस ट्रेड डील से खत्म होगा, बल्कि नए व्यापारिक अवसर भी खुलेंगे। व्यापारियों के अनुसार, अब चीनी मशीनों की जगह यूरोपियन क्वालिटी की आधुनिक मशीनें आयात की जा सकेंगी, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए सूरत के कपड़ा कारोबारियों ने कहा कि यह समझौता टेक्सटाइल उद्योग के भविष्य को नई दिशा देगा। फेडरेशन ऑफ टेक्सटाइल एंड ट्रेड एसोसिएशन के प्रमुख कैलाश हाकिम ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सरकार की लगभग 18 वर्षों की निरंतर मेहनत का परिणाम है। अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाकर भारतीय कारोबारियों को भयभीत करने की कोशिश की थी और बांग्लादेश की स्थिति खराब होने से भी व्यापार पर कुछ असर पड़ा, लेकिन यूरोप हमेशा भारत के लिए एक बड़ी उम्मीद बना रहा।
कैलाश हाकिम ने कहा कि अमेरिका की टैरिफ नीति भारत के खिलाफ ज्यादा असरदार साबित नहीं हो सकी, क्योंकि भारत सरकार की रणनीति ने उसे विफल कर दिया। यूरोप तकनीकी रूप से काफी मजबूत है और वहां उच्च गुणवत्ता की टेक्सटाइल मशीनें बनती हैं। ऐसे में मशीन इंपोर्ट और टेक्सटाइल व्यापार दोनों के लिए यह डील बेहद फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने बताया कि यूरोप में गारमेंट्स की बड़ी मांग है। पहले भारत करीब 9 प्रतिशत गारमेंट एक्सपोर्ट करता था। अब एफटीए के बाद सूरत के कारोबारियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर बनकर आया है।
उन्होंने कहा कि सूरत मैन-मेड फाइबर के लिए दुनियाभर में जाना जाता है और भारत से पूरी दुनिया व्यापार करना चाहती है। इस समझौते का सीधा लाभ सूरत और देश के अन्य टेक्सटाइल केंद्रों को मिलेगा। आने वाले समय में वैश्विक बाजार में भारतीय ब्रांड्स की मजबूत मौजूदगी देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री का आकार लगभग 150 लाख करोड़ रुपए का है और पूरे भारत में कृषि के बाद सबसे अधिक राजस्व टेक्सटाइल सेक्टर से ही आता है।
वहीं, टेक्सटाइल कारोबारी सुशील गुप्ता ने इस समझौते को भारत के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ वॉर से भारत को कहीं न कहीं भारी नुकसान हुआ था। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से यूरोप के साथ यह अहम समझौता संभव हो पाया है। उनके अनुसार, फ्री ट्रेड डील से टेक्सटाइल उद्योग को नई गति मिलेगी और निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
टेक्सटाइल कारोबारी जॉनी राठौड़ ने भी एफटीए को कारोबारियों के लिए बेहद फायदेमंद करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत को यूरोपीय देशों के साथ बिना टैक्स के व्यापार करने का बेहतरीन मौका मिला है और देश को एक बड़ा बाजार हासिल हुआ है। अब पहले जहां चीन से मशीनरी मंगाई जाती थी, उसकी जगह यूरोपीय देशों से उच्च गुणवत्ता की मशीनें आयात की जा सकेंगी। प्रधानमंत्री मोदी टेक्सटाइल कारोबारियों के हित में लगातार बेहतर काम कर रहे हैं और इसके लिए वे उनका दिल से धन्यवाद करते हैं।
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