गुजरात
आंगनवाड़ी केंद्रों में स्मार्ट पढ़ाई खेल खेल में बच्चों को मिल रही शिक्षा
Ratna Netam
23 Oct 2026 2:25 PM IST

x
राजकोट। गुजरात के राजकोट में छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा और सर्वांगीण विकास को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। राजकोट नगर निगम की ओर से संचालित मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में अब आधुनिक तकनीक, खेल-आधारित शिक्षा और पोषण सेवाओं को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना और उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा के लिए तैयार करना है।राजकोट नगर निगम वर्तमान में शहर के तीन जोन में कुल 364 मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन कर रहा है। इन केंद्रों में बच्चों को पारंपरिक शिक्षण पद्धति के बजाय मनोरंजक गतिविधियों, शैक्षिक खिलौनों और स्मार्ट टीवी के माध्यम से सिखाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ाने के साथ उनकी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक क्षमताओं को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
खेल-खेल में पढ़ाई, बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था
मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों की सबसे बड़ी विशेषता यहां अपनाई जा रही खेल-आधारित शिक्षण पद्धति है। बच्चों को पढ़ाई का बोझ महसूस कराए बिना विभिन्न गतिविधियों के जरिए नई चीजें सिखाई जा रही हैं।इन केंद्रों में उपलब्ध शैक्षिक खिलौनों, चित्रों और इंटरैक्टिव गतिविधियों की मदद से बच्चों को अक्षरों, शब्दों और संख्याओं की शुरुआती जानकारी दी जाती है। स्मार्ट टीवी के माध्यम से भी बच्चों को रोचक तरीके से सीखने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों में बचपन से ही जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की क्षमता को प्रोत्साहित करना है। खेल आधारित शिक्षा से बच्चों को अपनी उम्र के अनुसार विभिन्न अवधारणाओं को समझने में सहायता मिल सकती है।
पढ़ाई के साथ स्वच्छता और अच्छी आदतों पर जोर
इन मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को केवल भाषा और गणित की शुरुआती शिक्षा ही नहीं दी जा रही, बल्कि दैनिक जीवन में काम आने वाली महत्वपूर्ण आदतें भी सिखाई जा रही हैं।बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता का महत्व, नियमित हाथ धोने की आवश्यकता, साफ-सुथरा रहने के तरीके और स्वस्थ खान-पान की जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही अच्छे व्यवहार, अनुशासन और दूसरों के साथ मिलजुलकर रहने जैसी सामाजिक आदतों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को कम उम्र से ही स्वस्थ और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
छह घंटे चलती हैं आंगनवाड़ियां, चार घंटे सीखने पर जोर
राजकोट नगर निगम की प्रोग्राम ऑफिसर सरदाबेन देसाई ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र प्रतिदिन छह घंटे संचालित किए जाते हैं। इनमें शुरुआती चार घंटे विशेष रूप से खेल-आधारित शिक्षा और आवश्यक जीवन कौशल विकसित करने के लिए निर्धारित हैं।इस दौरान बच्चों को विभिन्न शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियों में शामिल किया जाता है, ताकि वे सहज वातावरण में सीख सकें। बच्चों की उम्र और समझ के अनुसार उन्हें प्रारंभिक शिक्षा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पोषण और स्वास्थ्य की भी निगरानी
शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रों में बच्चों की लंबाई, वजन और पोषण संबंधी स्थिति की निगरानी कर जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाती है। कुपोषण से प्रभावित बच्चों के अभिभावकों को पोषण संबंधी परामर्श भी उपलब्ध कराया जाता है।अभिभावकों को व्हाट्सऐप के माध्यम से बच्चों की गतिविधियों और प्रगति की जानकारी देने की व्यवस्था भी की गई है।
स्कूली शिक्षा के लिए मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश
मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों का प्रमुख उद्देश्य बच्चों को प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश से पहले बुनियादी शिक्षा और सामाजिक व्यवहार के लिए तैयार करना है।केंद्र सरकार की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा संबंधी रूपरेखा में भी गतिविधि-आधारित शिक्षण पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है।राजकोट में संचालित यह पहल बच्चों की शुरुआती शिक्षा को अधिक रोचक और उपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधुनिक तकनीक, पौष्टिक आहार और खेल-आधारित शिक्षण को जोड़कर बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
Next Story





