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Surat सूरत। अहमदाबाद के बाद अब डायमंड सिटी के नाम से प्रसिद्ध सूरत भी मेट्रो के सफर के लिए तैयार हो चुका है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी परिवहन को प्राथमिकता देते हुए पूरे प्रदेश में मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। इसी कड़ी में गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीएमआरसीएल) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
सूरत में ड्रीम सिटी और अलथान टेनामेंट के बीच 8.5 किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन शुरू कर दिया गया है। यह ट्रायल रन सूरतवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मेट्रो शुरू होने के बाद शहर के लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। उन्हें तेज, सुरक्षित, समयबद्ध और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा का बेहतर विकल्प उपलब्ध होगा। स्थानीय निवासियों में इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह है।
राज पटेल ने कहा, "सूरत में मेट्रो आने से दैनिक जीवन में बहुत सरलता होगी। सुबह से शाम पब्लिक ट्रांसपोर्ट के भरोसे रहने वाले लोगों को समय पर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में आसानी होगी। वर्षों के इंतजार के बाद मेट्रो मिल रही है, तो प्रत्येक सूरतवासी का दिल प्रसन्न है। रोशन चिमना ने कहा, "सूरत में यह काम बहुत जल्दी हुआ है। इससे बड़ी गौरव की बात और क्या हो सकती है।"
गुजरात जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के रीजनल चेयरमैन जयंती सावलिया ने कहा, "ट्रैफिक की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। डायमंड बोर्स तक मेट्रो शुरू होने से 45 हजार लोग आसानी से आवाजाही कर सकेंगे। पूरे शहर को जोड़ने वाली यह मेट्रो बहुत ही अच्छी तरह से डिजाइन की गई है।"
परियोजना निदेशक आनंद सिंह बिष्ट ने बताया, "कॉरिडोर-1 ड्रीम सिटी को सरथाणा से जोड़ता है जबकि कॉरिडोर-2 भेसान को सरोली से जोड़ता है। दोनों कॉरिडोर मिलकर सूरत के प्रमुख इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे।"
वर्तमान में ड्रीम सिटी और अलथान टेनामेंट के बीच 500 घंटे के ट्रायल रन का कार्य चल रहा है। इस दौरान मेट्रो की स्पीड, ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। इस रूट पर 7 मेट्रो स्टेशनों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। सुरक्षा जांच और सभी आवश्यक परीक्षण पूरे होने के बाद सूरत मेट्रो को जनता के लिए समर्पित कर दिया जाएगा।
सूरत मेट्रो का सबसे बड़ा फायदा डायमंड उद्योग को मिलने वाला है। मेट्रो के संचालन से डायमंड बोर्स तक सीधी कनेक्टिविटी स्थापित हो जाएगी। वराछा, कतारगाम, सरथाणा और आसपास के इलाकों से रोजाना 40 से 45 हजार कारीगर और व्यापारी डायमंड बोर्स तक तेज और आरामदायक यात्रा कर सकेंगे। इससे डायमंड उद्योग की उत्पादकता और रफ्तार दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
सूरत मेट्रो रेल प्रोजेक्ट दो प्रमुख कॉरिडोर पर आधारित है। पहला ‘डायमंड कॉरिडोर’ (कॉरिडोर-1) सरथाणा से ड्रीम सिटी तक है। इसकी कुल लंबाई 21.6 किलोमीटर है, जिसमें 15 किलोमीटर एलिवेटेड और 6.5 किलोमीटर अंडरग्राउंड हिस्सा शामिल है। इसमें 14 एलिवेटेड और 6 अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं।
दूसरा ‘टेक्सटाइल कॉरिडोर’ (कॉरिडोर-2) भेसान से सरोली तक है। इसकी कुल लंबाई 18.7 किलोमीटर है और यह पूरी तरह एलिवेटेड है। इसमें 18 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 40.35 किलोमीटर है, जिसमें 38 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा ड्रीम सिटी और भेसान में दो आधुनिक डिपो भी विकसित किए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट का 6.47 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड होगा।
मेट्रो प्रोजेक्ट पूरा होने पर सूरत न केवल ट्रैफिक जाम से मुक्त होगा, बल्कि यह शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। गुजरात सरकार का यह प्रयास आधुनिक, सस्टेनेबल और जन-उपयोगी शहरी परिवहन का बेहतरीन उदाहरण बन रहा है।
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