
अमरेली। गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, अमरेली के पूर्व सांसद और पूर्व विधायक वीरजी ठुम्मर का बुधवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और उपचार चल रहा था। उनके निधन से गुजरात कांग्रेस के साथ-साथ सौराष्ट्र की राजनीति में शोक की लहर है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वीरजी ठुम्मर 67 वर्ष के थे और उन्होंने बुधवार दोपहर अमरेली में अंतिम सांस ली।
वीरजी ठुम्मर गुजरात की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख पाटीदार नेताओं में गिने जाते थे। अमरेली और सौराष्ट्र क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ रही। किसान परिवार से आने वाले ठुम्मर ने स्थानीय राजनीति से अपना सफर शुरू किया और आगे चलकर विधानसभा तथा लोकसभा दोनों में जनता का प्रतिनिधित्व किया।
उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव 2004 का लोकसभा चुनाव रहा, जब वह कांग्रेस के टिकट पर अमरेली संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए। उन्होंने 2004 से 2009 तक लोकसभा में अमरेली का प्रतिनिधित्व किया। सांसद के रूप में उन्होंने किसानों, सिंचाई, फसल बीमा और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को उठाया।
लोकसभा के अलावा वीरजी ठुम्मर गुजरात विधानसभा के भी सदस्य रहे। वह 1990 और 1995 में बाबरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लाठी-बाबरा क्षेत्र से जीत दर्ज की और 2017 से 2022 तक विधायक के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
राजनीति में उनका लंबा अनुभव और सौराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों से सीधा जुड़ाव उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। ठुम्मर को विशेष रूप से किसानों के मुद्दों को मुखरता से उठाने वाले नेता के रूप में जाना जाता था। कांग्रेस संगठन में भी उनका प्रभाव अमरेली जिले से आगे पूरे सौराष्ट्र तक माना जाता था।
वीरजी ठुम्मर पिछले करीब चार वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे। बीमारी के बावजूद वह लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे। बुधवार दोपहर करीब 12:15 बजे उनके निधन की खबर सामने आई, जिसके बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय नेता उनके आवास पर पहुंचने लगे।
उनके निधन की खबर के बाद गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने शोक व्यक्त किया। राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने उन्हें अपना करीबी मित्र बताते हुए श्रद्धांजलि दी। गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक लोगों के हितों के लिए काम करने वाले वीरजी ठुम्मर का निधन कांग्रेस परिवार और गुजरात के लिए बड़ी क्षति है।
कांग्रेस नेता जगदीश ठाकोर ने भी उनके साथ लंबे राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए शोक जताया। आम आदमी पार्टी के नेता इसुदान गढ़वी समेत अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की।
वीरजी ठुम्मर की पहचान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं थी। अमरेली जिले के सहकारी क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों से जुड़े संस्थानों के साथ उनके लंबे संबंधों ने उन्हें क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक आधार दिया।
उनकी राजनीतिक शैली में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना शामिल था। विधानसभा हो या लोकसभा, उन्होंने किसानों की समस्याओं, सिंचाई के पानी, फसल बीमा और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े सवालों को कई बार उठाया।
ठुम्मर को अमरेली कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में गिना जाता था। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संपर्क रखने के कारण पार्टी में उनकी अलग पहचान बनी।
उनकी बेटी जेनीबेन ठुम्मर भी सक्रिय राजनीति में हैं। वह अमरेली जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं और गुजरात महिला कांग्रेस का नेतृत्व भी कर चुकी हैं। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। इस तरह ठुम्मर परिवार लंबे समय से अमरेली की राजनीति में सक्रिय रहा है।
वीरजी ठुम्मर के निधन के बाद अमरेली में बड़ी संख्या में उनके समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया। उनकी अंतिम यात्रा बुधवार शाम अमरेली से निकाले जाने की जानकारी सामने आई।
सौराष्ट्र की राजनीति में पाटीदार समुदाय का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है और वीरजी ठुम्मर कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने इस समुदाय के बीच लंबे समय तक राजनीतिक पकड़ बनाए रखी। यही कारण है कि पार्टी में उन्हें एक महत्वपूर्ण पाटीदार चेहरे के रूप में देखा जाता था।
कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने कई चुनावी और संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। पार्टी सत्ता में रही हो या विपक्ष में, वह अमरेली और सौराष्ट्र से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे।
उनका सार्वजनिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। जिला स्तर की राजनीति से शुरुआत कर विधानसभा और फिर लोकसभा तक पहुंचना उनके लंबे राजनीतिक सफर का हिस्सा रहा।
2004 में अमरेली से सांसद बनना उनके राजनीतिक करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। इसके बाद भी उन्होंने राज्य की राजनीति में सक्रियता बनाए रखी और 2017 में एक बार फिर विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की।
2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने लाठी सीट से चुनाव मैदान में उतरकर सक्रिय राजनीति जारी रखी थी।
उनके समर्थकों के अनुसार ठुम्मर की सबसे बड़ी विशेषता लोगों के बीच सहज उपलब्धता थी। ग्रामीण इलाकों के कार्यकर्ताओं और किसानों के साथ उनका संपर्क लगातार बना रहता था।
कांग्रेस नेताओं ने उनके निधन को संगठन के लिए बड़ी क्षति बताया है। पार्टी के लिए वह अनुभव, जनाधार और संगठनात्मक पकड़—तीनों का प्रतिनिधित्व करते थे।
वीरजी ठुम्मर के निधन के साथ गुजरात कांग्रेस ने सौराष्ट्र क्षेत्र का एक अनुभवी नेता खो दिया है। अमरेली और आसपास के क्षेत्रों में उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक योगदान को याद किया जा रहा है।
कैंसर से लंबे संघर्ष के बाद बुधवार को उनका निधन हुआ। उनके निधन के बाद राजनीतिक दलों की सीमाओं से परे नेताओं ने श्रद्धांजलि देते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
वीरजी ठुम्मर का राजनीतिक सफर किसान परिवार से शुरू होकर विधानसभा और संसद तक पहुंचा। यही वजह है कि उनके निधन को केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अमरेली और सौराष्ट्र की राजनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है।





