गुजरात

Semiconductor मिशन से बढ़ी देश की तकनीकी ताकत

Kanchan Paikara
4 July 2026 7:06 PM IST
Semiconductor मिशन से बढ़ी देश की तकनीकी ताकत
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Ahmedabad अहमदाबाद : भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को शनिवार को एक और बड़ी उपलब्धि मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में सीजी सेमी की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) इकाई का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत ने पांच साल पहले जो सेमीकंडक्टर हब बनने का संकल्प लिया था, वह अब तेजी से वास्तविकता में बदल रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश की इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति का अगला बड़ा चरण बताते हुए कहा कि
‘डिजाइन इन इंडिया’
और ‘मेक इन इंडिया’ की सोच अब सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण के क्षेत्र में भी मजबूती से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक उद्योग नहीं बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट में चिप पैकेजिंग का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इसे भारत, जापान और थाईलैंड के उद्योग साझेदारों के बीच मजबूत सहयोग, भरोसे और तकनीकी साझेदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि शिलान्यास से लेकर उत्पादन तक का यह तेज़ सफर भारत की बढ़ती औद्योगिक क्षमता और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “आज का यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत जो ठान लेता है, वह करके दिखाता है। पांच साल पहले हमने देश को सेमीकंडक्टर हब बनाने का संकल्प लिया था और आज हम उस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार की नीति ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देने की है, और अब यही मॉडल सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी सफलता के नए मानक स्थापित कर रहा है। देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट में चिप पैकेजिंग का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होना इस दिशा में एक बड़ा कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि विदेशी कंपनियों के निवेश में भी वृद्धि होगी।
यह परियोजना भारत को वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन में एक मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है। सेमीकंडक्टर उद्योग में बढ़ती मांग को देखते हुए भारत का यह कदम आने वाले वर्षों में रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा।
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