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गांधीनगर: गुजरात सरकार सरकारी इमारतों में ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने की अपनी योजना को और विस्तार देने जा रही है। क्लाइमेट चेंज मिनिस्टर अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं। सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में 15,000 और सरकारी इमारतों को इस पहल के तहत लाने का लक्ष्य रखा है।
सरकार की यह पहल राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में की जा रही है। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों में बिजली की लागत घटाने पर भी जोर दिया जा रहा है। रूफटॉप सोलर सिस्टम के जरिए सरकारी भवन अपनी जरूरत के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकेंगे और ग्रिड पर बिजली की निर्भरता भी कम की जा सकेगी।
यह कार्यक्रम वर्ष 2011-12 से गुजरात के क्लाइमेट चेंज डिपार्टमेंट के तहत गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी यानी GEDA द्वारा लागू किया जा रहा है। लंबे समय से चल रहे इस कार्यक्रम के जरिए राज्य के विभिन्न सरकारी भवनों को चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य सरकारी क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने के साथ ऊर्जा बचत को भी प्रोत्साहित करना है।
राज्य सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 1,377 सरकारी इमारतों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए गए। इन संयंत्रों की स्थापना के बाद राज्य में 17.1 मेगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ी। इसके साथ ही इस कार्यक्रम के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम वाली सरकारी इमारतों की कुल संख्या 6,014 तक पहुंच गई है।
सरकारी इमारतों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाने से दो स्तरों पर फायदा होने की उम्मीद है। पहला, इससे सौर ऊर्जा के रूप में स्वच्छ और नवीकरणीय बिजली का उत्पादन बढ़ेगा। दूसरा, सरकारी संस्थानों पर बिजली खरीद का खर्च कम करने में मदद मिलेगी। सरकारी कार्यालयों में बड़ी मात्रा में बिजली की खपत होती है, इसलिए छतों पर सौर संयंत्र लगाना लंबे समय में ऊर्जा लागत को नियंत्रित करने का एक तरीका माना जा रहा है।
क्लाइमेट चेंज मिनिस्टर अर्जुन मोढवाडिया के मुताबिक, राज्य सरकार स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कार्यक्रमों को लगातार विस्तार दे रही है। सरकारी भवनों पर सोलर सिस्टम लगाने का कार्यक्रम भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। 15,000 अतिरिक्त इमारतों को इस वित्तीय वर्ष में योजना से जोड़ने का लक्ष्य पूरा होने पर सरकारी क्षेत्र में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
रूफटॉप सोलर सिस्टम में भवन की छत पर सौर पैनल लगाए जाते हैं और इनसे पैदा होने वाली बिजली का उपयोग उसी इमारत में किया जा सकता है। ग्रिड से जुड़े सिस्टम में जरूरत और उत्पादन के हिसाब से बिजली व्यवस्था को ग्रिड के साथ जोड़ा जाता है। इस व्यवस्था से सरकारी भवनों में बिजली की उपलब्धता को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने और सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
गुजरात पहले से ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सक्रिय राज्यों में शामिल रहा है। राज्य में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ छोटे स्तर पर रूफटॉप सोलर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकारी इमारतों को इस कार्यक्रम के दायरे में लाने से सरकारी तंत्र खुद स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।
इस पहल का एक अहम उद्देश्य बिजली के पुराने या पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करना भी है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से ऊर्जा के मिश्रण में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है। सरकारी भवनों की बड़ी संख्या को सौर ऊर्जा से जोड़ना राज्य के ऊर्जा संक्रमण कार्यक्रम में योगदान कर सकता है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,377 इमारतों में सिस्टम लगाए जाने के बाद अब 15,000 अतिरिक्त इमारतों का लक्ष्य रखा गया है। इससे यह साफ है कि सरकार इस योजना का विस्तार बड़े स्तर पर करना चाहती है। नई इमारतों को जोड़ने के साथ पहले से लगाए गए सिस्टम की निगरानी और उनका प्रभावी संचालन भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि अपेक्षित ऊर्जा बचत और उत्पादन हासिल किया जा सके।
सरकारी कार्यालयों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होने से बिजली के मासिक खर्च में भी कमी आने की संभावना है। इससे बचने वाले सरकारी संसाधनों का उपयोग अन्य प्रशासनिक और जनकल्याणकारी कार्यों में किया जा सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत प्रत्येक भवन की बिजली खपत, सौर संयंत्र की क्षमता, मौसम और रखरखाव जैसे कारकों पर निर्भर करेगी।
इस कार्यक्रम का पर्यावरणीय पहलू भी महत्वपूर्ण है। नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। लंबे समय में इससे स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के राज्य के प्रयासों को समर्थन मिल सकता है।
GEDA द्वारा 2011-12 से संचालित यह कार्यक्रम अब एक बड़े विस्तार के चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। 6,014 सरकारी इमारतों तक पहुंच चुकी योजना को 15,000 और भवनों तक ले जाने का लक्ष्य सरकारी क्षेत्र में सौर ऊर्जा का दायरा काफी बढ़ा सकता है। इससे सरकारी इमारतें ऊर्जा उत्पादन की छोटी इकाइयों के रूप में भी काम कर सकेंगी।
कुल मिलाकर, गुजरात सरकार सरकारी इमारतों में रूफटॉप सोलर सिस्टम के विस्तार के जरिए स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 2025-26 में 1,377 भवनों में 17.1 मेगावाट क्षमता जुड़ने के बाद अब मौजूदा वित्तीय वर्ष में 15,000 और इमारतों को इस पहल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम का फोकस नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ाने, पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता घटाने और सरकारी कार्यालयों की ऊर्जा लागत कम करने पर है।
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