
x
गांधीनगर। देश में सूचना के अधिकार को लेकर जागरूकता बढ़ाने और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से हर साल 5 से 12 अक्टूबर तक ‘सूचना का अधिकार सप्ताह’ मनाया जाता है। इसी क्रम में गुजरात सूचना आयोग, गांधीनगर ने 5 से 7 अक्टूबर तक विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना और नागरिकों को उनके सूचना संबंधी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मुख्य सूचना आयुक्त सुब्रमण्यम आर. अय्यर और राज्य सूचना आयुक्त मनोज पटेल, निखिल भट्ट, विपुल रावल और भरत गनात्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सूचना के अधिकार की भूमिका, प्रशासन में पारदर्शिता और नागरिकों तक सरकारी जानकारी की आसान पहुंच जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया।सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सरकारी विभागों और सार्वजनिक प्राधिकरणों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना प्राप्त करने का अधिकार देता है। इसका मूल उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है। गुजरात में भी सूचना आयोग अलग-अलग माध्यमों से लोगों को कानून के प्रावधानों और इसका इस्तेमाल करने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करता रहा है।
तीन दिनों तक आयोजित कार्यक्रमों में RTI अधिनियम के व्यावहारिक उपयोग, सूचना उपलब्ध कराने में सार्वजनिक सूचना अधिकारियों की भूमिका और आवेदनों के समयबद्ध निपटारे जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी अधिनियम के तहत अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह समझें।आयोग ने पारदर्शी प्रशासन को सुशासन का महत्वपूर्ण आधार बताया। कार्यक्रमों के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं, नीतियों, निर्णयों और प्रक्रियाओं से संबंधित अधिक से अधिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाने से नागरिकों को बार-बार RTI आवेदन दाखिल करने की जरूरत कम हो सकती है।
सूचना का अधिकार अधिनियम में सार्वजनिक प्राधिकरणों से कई प्रकार की सूचनाओं को स्वयं सार्वजनिक करने की अपेक्षा की गई है। विभागों की वेबसाइट, नोटिस और अन्य माध्यमों से जानकारी उपलब्ध कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे एक तरफ सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ नागरिक भी विभिन्न योजनाओं और प्रक्रियाओं के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।गुजरात में इससे पहले भी सूचना का अधिकार सप्ताह के दौरान सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। वर्ष 2024 में गुजरात सूचना आयोग की ओर से गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में भी RTI अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी विभागों द्वारा अधिक से अधिक जानकारी वेबसाइट पर प्रकाशित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। उस समय भी अधिकारियों ने कहा था कि लोगों तक सूचना आसानी से पहुंचने से सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही मजबूत होती है।
RTI व्यवस्था में सार्वजनिक सूचना अधिकारी यानी PIO की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी नागरिक द्वारा मांगी गई सूचना संबंधित विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध होने और कानून के तहत अपवाद की श्रेणी में नहीं आने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराई जाती है। वहीं सूचना न मिलने या जवाब से असंतुष्ट होने की स्थिति में प्रथम अपील और उसके बाद सूचना आयोग में दूसरी अपील अथवा शिकायत की व्यवस्था मौजूद है।सूचना का अधिकार सप्ताह के आयोजन का एक प्रमुख लक्ष्य लोगों को इसी प्रक्रिया से परिचित कराना भी है। कई नागरिक अधिकार होने के बावजूद आवेदन की प्रक्रिया, निर्धारित समयसीमा या अपील की व्यवस्था के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रम कानून को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आयोग की ओर से इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया गया कि सूचना का अधिकार केवल जानकारी मांगने का साधन नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच विश्वास मजबूत करने का माध्यम भी है। जब सरकारी कार्यों से जुड़ी जानकारी नागरिकों के लिए आसानी से उपलब्ध होती है, तो निर्णय प्रक्रिया को समझना आसान होता है और शिकायतों के समाधान में भी मदद मिल सकती है।RTI अधिनियम लागू होने के बाद पिछले दो दशकों में विभिन्न स्तरों पर नागरिकों ने सरकारी रिकॉर्ड, विकास कार्यों, योजनाओं, नियुक्तियों, खर्च और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया है। हालांकि इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकारी विभागों और सूचना अधिकारियों की सक्रिय भूमिका को भी उतना ही जरूरी माना जाता है।
गुजरात सूचना आयोग के कार्यक्रम में इसी कारण अधिकारियों और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी पर जोर दिया गया। अधिकारियों से कानून में निर्धारित समयसीमा और प्रावधानों का पालन करने की अपेक्षा की गई, जबकि नागरिकों को RTI का जिम्मेदारीपूर्वक और सही उद्देश्य के लिए उपयोग करने के प्रति जागरूक किया गया।सूचना का अधिकार सप्ताह के तहत आयोजित गतिविधियों में कानून से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने की जरूरत भी रेखांकित की गई। आयोग का मानना है कि अधिक जागरूक नागरिक प्रशासन से सही सवाल पूछ सकेंगे और सरकारी सेवाओं तथा योजनाओं से संबंधित सूचनाओं तक बेहतर तरीके से पहुंच बना पाएंगे।
डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग ने भी सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाया है। कई विभाग अब आवेदन, अपील और मामलों की स्थिति से संबंधित सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं। गुजरात में पहले आयोजित RTI कार्यक्रमों में भी तकनीक के इस्तेमाल और ऑनलाइन सूचना उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया था।5 से 7 अक्टूबर तक हुए इन कार्यक्रमों के जरिए गुजरात सूचना आयोग ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सूचना तक पहुंच नागरिकों को सशक्त बनाने और प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन, समय पर सूचना उपलब्ध कराने और अधिकतम सरकारी जानकारी स्वप्रेरणा से सार्वजनिक करने की जरूरत को प्रमुखता से सामने रखा।सूचना का अधिकार सप्ताह के आयोजन का व्यापक उद्देश्य यही है कि नागरिक अपने अधिकारों को समझें और सरकारी संस्थाएं अपने दायित्वों के प्रति अधिक जवाबदेह बनें। गुजरात सूचना आयोग द्वारा आयोजित कार्यक्रम इसी दिशा में जन-जागरूकता और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने की पहल के रूप में सामने आए हैं।
Next Story





