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गुजरात UCC बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी

Ratna Netam
2 Oct 2026 7:51 PM IST
गुजरात UCC बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी
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अहमदाबाद। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल, 2026 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक विधेयक को 17 सितंबर को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली थी। इसके साथ गुजरात में समान नागरिक संहिता को लागू करने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। हालांकि कानून उस तारीख से प्रभावी होगा, जिसे गुजरात सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर निर्धारित करेगी।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद गुजरात में UCC को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इसे समानता और महिलाओं के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है, जबकि विपक्षी कांग्रेस ने कानून को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराई हैं। दोनों दलों के बीच इसके उद्देश्य और संभावित प्रभाव को लेकर पहले से मतभेद रहे हैं।
गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक पारित किया था। विधेयक को विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा गया था। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य सरकार इसके क्रियान्वयन के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी।
गुजरात UCC में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। कानून पूरे गुजरात में लागू होगा और गुजरात के उन निवासियों पर भी लागू होने का प्रावधान है जो राज्य से बाहर रह रहे हैं। हालांकि अनुसूचित जनजातियों और संविधान के भाग XXI के तहत संरक्षित कुछ परंपरागत अधिकारों वाले व्यक्तियों या समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
विवाह के मामले में कानून एक विवाह की व्यवस्था को आधार बनाता है। इसके अनुसार विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवित जीवनसाथी नहीं होना चाहिए। पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित है। धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करने की व्यवस्था बनी रहेगी। कानून में सप्तपदी, निकाह, आनंद कारज और मंगल फेरा जैसी प्रथाओं का भी उल्लेख है।
नए कानून में विवाह के पंजीकरण को अनिवार्य करने का प्रावधान है। कानून लागू होने के बाद होने वाले विवाहों के लिए निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण से संबंधित जानकारी जमा करनी होगी। इसके साथ ही तलाक के लिए भी समान आधार तय किए गए हैं। इनमें व्यभिचार, क्रूरता, कम से कम दो साल तक परित्याग, धर्म परिवर्तन और सात साल तक किसी व्यक्ति का पता नहीं चलना जैसे आधार शामिल हैं।
UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। गुजरात में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसकी जानकारी देना आवश्यक होगा। गुजरात के ऐसे निवासी जो राज्य के बाहर रहते हैं, उनके लिए भी इससे संबंधित व्यवस्था कानून में दी गई है।
उत्तराधिकार के मामलों में भी समान व्यवस्था बनाने का प्रयास किया गया है। बिना वसीयत के किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसकी संपत्ति के उत्तराधिकार के लिए कानून में अलग-अलग श्रेणियों के उत्तराधिकारियों की व्यवस्था निर्धारित की गई है। सरकार ने विधेयक पेश करते समय इसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में समान कानूनी ढांचा उपलब्ध कराने की पहल बताया था।
राष्ट्रपति की मंजूरी का BJP ने स्वागत किया है। पार्टी लंबे समय से यूनिफॉर्म सिविल कोड को अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल करती रही है। मार्च में गुजरात विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसका स्वागत करते हुए कहा था कि हर नागरिक के लिए समान कानून BJP की लंबे समय से प्रतिबद्धता रही है। उन्होंने इसे समान कानून और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे के रूप में पेश किया था।
गुजरात सरकार की ओर से विधेयक पेश करते समय भी समानता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार को इसके उद्देश्यों में शामिल किया गया था। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया कि प्रस्तावित व्यवस्था का लक्ष्य धर्म, जाति, पंथ या लिंग से अलग नागरिक मामलों के लिए समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। यह सरकार द्वारा विधेयक के लिए प्रस्तुत औपचारिक तर्क है।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने विधानसभा में विधेयक का विरोध किया था। गुजरात कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि विधेयक को जल्दबाजी में लाया गया और इसे विस्तृत विचार-विमर्श के लिए सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए था। कांग्रेस ने विधेयक के समय और राजनीतिक उद्देश्य को लेकर भी सवाल उठाए थे। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं, जबकि BJP और राज्य सरकार ने UCC को समानता और समान नागरिक कानून की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
इस तरह राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी UCC को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। BJP इसे नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस कानून बनाने की प्रक्रिया और उसके स्वरूप को लेकर सवाल उठा रही है।
गुजरात UCC को लेकर अगला महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार की अधिसूचना होगी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाने के बावजूद कानून के प्रभावी होने की तारीख राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जानी है। इसके बाद इसके विभिन्न प्रावधान व्यवहार में लागू होंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी से गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026 की संवैधानिक स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों वाले इस कानून के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। वहीं BJP और कांग्रेस के अलग-अलग रुख के कारण UCC पर राजनीतिक बहस भी जारी रहने की संभावना है।
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