
अहमदाबाद। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस मामले में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए खरगे के बयान की निंदा की है। संघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के 140 करोड़ लोगों के प्यार और विश्वास से घिरे हुए हैं तथा कांग्रेस इस घेरे को कभी नहीं तोड़ पाएगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे।' दरअसल, 25 अक्टूबर को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर एक टिप्पणी की थी, जिसे भाजपा ने आपत्तिजनक बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना की। वहीं कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष के बयान का अलग संदर्भ बताते हुए भाजपा पर राजनीतिक विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया है।
यह राजनीतिक विवाद उस समय शुरू हुआ, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 25 अक्टूबर को पटना में बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता से नहीं हटने से संबंधित टिप्पणी की। इस पर खरगे ने तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रधानमंत्री के पिता का उल्लेख करते हुए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया।
खरगे के इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष पर राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी नेता के परिवार या दिवंगत परिजनों को टिप्पणी में शामिल करना उचित नहीं है।
वहीं कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम की अलग व्याख्या प्रस्तुत की। कांग्रेस का दावा है कि खरगे के संबोधन के दौरान जानबूझकर व्यवधान पैदा किया गया था और उनकी प्रतिक्रिया को उसके संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया जा रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दावा किया कि खरगे की टिप्पणी प्रधानमंत्री के पिता के संदर्भ में नहीं, बल्कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वैचारिक नेतृत्व के संदर्भ में थी। हालांकि भाजपा ने कांग्रेस की इस सफाई को स्वीकार नहीं किया।
इस विवाद में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की।
संघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता के स्नेह से जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस के नेता चाहे जितनी भी आलोचना करें, प्रधानमंत्री को मिलने वाले जनसमर्थन को समाप्त नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रति लोगों का समर्थन केवल किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। संघवी ने अपने बयान में देश के 140 करोड़ लोगों के प्रेम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
हालांकि 140 करोड़ लोगों के समर्थन का उनका कथन राजनीतिक अभिव्यक्ति है, इसे प्रत्येक नागरिक की राजनीतिक राय का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
संघवी ने प्रधानमंत्री के संबंध में 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे' का संदेश भी दिया। इस टिप्पणी को कांग्रेस अध्यक्ष के बयान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी खरगे की टिप्पणी की निंदा की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का प्रधानमंत्री के पिता को लेकर टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
भूपेंद्र पटेल के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक विचारों और नीतियों पर आलोचना की जा सकती है, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियां सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं।
गुजरात के दोनों शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी खरगे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने राजनीतिक शिष्टाचार की सीमाओं का उल्लंघन किया है।
शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं की ओर से पहले भी प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार को निशाना बनाया गया है। उन्होंने इसे कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति की आलोचना से जोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए।
अमित शाह ने दावा किया कि कांग्रेस नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा ले रही है। हालांकि यह भाजपा की ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है।
गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान भी यह विवाद चर्चा में रहा। शुक्रवार को बनासकांठा में आयोजित कार्यक्रम में कुछ महिला समर्थक 'मोदी कहीं नहीं जाएगा' लिखी तख्तियां लेकर पहुंचीं। कार्यक्रम के दौरान इसी आशय के नारे भी लगाए गए।
महिला समर्थकों की तस्वीरों और वीडियो को खरगे के बयान के बाद सामने आए राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया। हालांकि इन महिलाओं ने व्यक्तिगत रूप से किस उद्देश्य से नारे लगाए, इसका अलग से कोई विस्तृत बयान उपलब्ध नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर बनासकांठा पहुंचे थे। यहां उन्होंने कृषि, पशुपालन और अन्य क्षेत्रों से संबंधित विकास परियोजनाओं के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे। बनासकांठा में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
इस बीच कांग्रेस और भाजपा के बीच विवाद केवल खरगे के शब्दों तक सीमित नहीं रहा। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर राजनीतिक शिष्टाचार का उल्लंघन करने के आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि भाजपा उसके नेताओं के बयानों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत करके राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि पटना के कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करने वाले व्यक्ति की भूमिका क्या थी।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस की सफाई को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ नेताओं को अपने शब्दों की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
पटना के कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करने वाले व्यक्ति की पहचान संतोष कुमार के रूप में सामने आई थी। बाद में उसने दावा किया कि उसकी टिप्पणी का अर्थ गलत समझा गया था। उसने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की आलोचना कर रहा था।
इस घटनाक्रम ने विवाद की परिस्थितियों को और जटिल बना दिया। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने-अपने पक्ष में अलग-अलग तर्क प्रस्तुत किए हैं।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखें तो यह विवाद नेताओं की भाषा, सार्वजनिक संवाद और व्यक्तिगत टिप्पणियों की सीमाओं जैसे विषयों को सामने लाता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों, फैसलों और कार्यप्रणाली पर आलोचना करना विपक्ष की भूमिका का हिस्सा है।
इसी तरह सत्तापक्ष को भी आलोचना का जवाब तथ्यों और तर्कों के आधार पर देने का अवसर मिलता है। हालांकि राजनीतिक बहस में व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियां शामिल होने पर विवाद बढ़ सकता है।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा की आलोचना की है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति समर्थन व्यक्त किया और कांग्रेस के आरोपों का विरोध किया।
दूसरी ओर कांग्रेस इस बात पर जोर दे रही है कि उसके नेताओं को सरकार की आलोचना करने का लोकतांत्रिक अधिकार है। पार्टी का कहना है कि वास्तविक राजनीतिक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए विवाद को बढ़ाया जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। कोलकाता में 26 अक्टूबर को भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खरगे के बयान के विरोध में रैली निकाली और कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग की।
फिलहाल मल्लिकार्जुन खरगे के बयान और हर्ष संघवी सहित भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं से दोनों दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
इस विवाद में आगे कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया और भाजपा के रुख पर नजर रहेगी। वहीं प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात दौरे के दौरान सामने आए समर्थन के नारों ने इस राजनीतिक बहस को एक नया संदर्भ दिया है।





