गुजरात

वन विभाग का बड़ा कदम, प्राकृतिक पारिस्थितिकी को मजबूत करने के लिए जंगलों में छोड़े चीतल

nidhi
20 July 2026 1:25 PM IST
वन विभाग का बड़ा कदम, प्राकृतिक पारिस्थितिकी को मजबूत करने के लिए जंगलों में छोड़े चीतल
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सूरत के जंगलों में छोड़े गए 50 चीतल, वन विभाग की अनोखी पहल के पीछे जानिए वजह

Gujarat: गुजरात वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सूरत जिले के मंडवी वन क्षेत्र में 50 चीतलों (स्पॉटेड डियर) को छोड़ा है। इन चीतलों को सासन गिर वन्यजीव प्रभाग से लाकर चरणबद्ध तरीके से जंगल में बसाया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जंगलों में प्राकृतिक शिकार (Prey Base) को मजबूत करना, जैव विविधता बढ़ाना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।

क्यों छोड़े गए 50 चीतल?
वन विभाग के अनुसार, जंगल में मांसाहारी वन्यजीवों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक शिकार होना बेहद जरूरी है। यदि जंगल में हिरण, चीतल और अन्य शाकाहारी जीवों की संख्या कम हो जाती है, तो तेंदुए जैसे शिकारी भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ सकते हैं।
ऐसी स्थिति में—
मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।
पालतू पशुओं पर हमलों की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
वन्यजीवों और स्थानीय लोगों दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए चीतलों का पुनर्स्थापन (Translocation) किया गया है।
तीन चरणों में पूरा हुआ अभियान
वन विभाग ने इस अभियान को एक साथ पूरा करने के बजाय तीन चरणों में अंजाम दिया।
23 मई को 21 चीतल छोड़े गए।
18 जून को 16 चीतलों को जंगल में छोड़ा गया।
24 जून को 13 और चीतलों का पुनर्स्थापन किया गया।
इस तरह कुल 50 चीतलों को मंडवी वन क्षेत्र में बसाया गया।
केवल चीतल छोड़ना ही नहीं, पूरी तैयारी भी की गई
वन विभाग ने चीतलों को छोड़ने से पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया। अधिकारियों ने जंगल के ऐसे हिस्सों का चयन किया जहां पर्याप्त भोजन, पानी और सुरक्षित आवास उपलब्ध हो।
इसके अलावा—
10 स्थायी जल स्रोत विकसित किए गए।
कैमरा ट्रैप लगाए गए।
वन रक्षकों और प्रशिक्षित ट्रैकर्स की निगरानी टीम बनाई गई।
चीतलों की गतिविधियों और स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
कैसे कम होगा मानव-वन्यजीव संघर्ष?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जंगल में पर्याप्त संख्या में प्राकृतिक शिकार मौजूद रहेगा तो शिकारी जीवों को भोजन के लिए गांवों या खेतों की ओर जाने की आवश्यकता कम पड़ेगी।
इससे—
तेंदुओं का मानव बस्तियों में प्रवेश घट सकता है।
पालतू पशुओं पर हमलों में कमी आ सकती है।
वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास में बने रहेंगे।
स्थानीय लोगों और वन्यजीवों के बीच टकराव कम होगा।
जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा
चीतल भारतीय जंगलों की खाद्य श्रृंखला (Food Chain) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी संख्या बढ़ने से पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ मिलता है।
इसके प्रमुख फायदे—
मांसाहारी जीवों के लिए पर्याप्त भोजन।
जंगल का प्राकृतिक संतुलन मजबूत होना।
वन्यजीवों की विविधता में वृद्धि।
दीर्घकालिक पारिस्थितिक संरक्षण को बढ़ावा।
वैज्ञानिक आधार पर किया गया संरक्षण
वन विभाग का कहना है कि यह पहल केवल चीतलों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक वन प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है। अभियान को वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों और वैज्ञानिक आकलन के आधार पर लागू किया गया है, ताकि नए आवास में चीतल सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें।
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