
तापी। गुजरात के तापी जिले में स्थित एक शुगर मिल में गुरुवार शाम भीषण हादसा हो गया। वलोद तालुका के दादरिया गांव में स्थित कॉपर शुगर मिल में गर्म और ठंडे पानी के विशाल टैंक अचानक धराशायी हो गए। इस दुर्घटना में मिल में काम कर रहे दो कर्मचारी भारी मलबे के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। करीब पांच से छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों कर्मचारियों के शव मलबे से बाहर निकाले गए। शुक्रवार को अधिकारियों ने दोनों की मौत की पुष्टि की।
जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार, 5 नवंबर की शाम करीब 6:45 बजे हुआ। उस समय शुगर मिल में सामान्य रूप से कामकाज चल रहा था। कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यों में व्यस्त थे। इसी दौरान मिल परिसर में गर्म और ठंडे पानी के भंडारण के लिए बनाए गए बड़े टैंक अचानक गिर गए। भारी संरचना गिरने से वहां अफरा-तफरी मच गई। टैंक के आसपास काम कर रहे दो कर्मचारी मलबे की चपेट में आ गए और बाहर नहीं निकल सके।
मृतकों की पहचान दादरिया गांव निवासी धर्मेश पटेल और कलकवा गांव निवासी अरुण पटेल के रूप में हुई है। दोनों शुगर मिल में कार्यरत थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टैंक के नजदीक से गुजरने वाली पाइपलाइन के आसपास दोनों कर्मचारियों के शव मिले। हादसे की खबर मिलते ही कर्मचारियों के परिवारों में शोक का माहौल छा गया।
बताया जा रहा है कि दुर्घटना के तुरंत बाद मिल में मौजूद अन्य कर्मचारी घटनास्थल की ओर दौड़े। विशाल टैंक गिरने के कारण भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया था। इसके नीचे दबे कर्मचारियों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद व्यारा और बारडोली से दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिसकर्मियों ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद मलबे के नीचे फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया गया।
बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि भारी टैंक और उसके टूटे हुए हिस्सों के नीचे कर्मचारियों के दबे होने की आशंका थी। राहत दलों ने सावधानीपूर्वक मलबा हटाने का काम शुरू किया। कर्मचारियों की तलाश के लिए आवश्यक उपकरणों और मशीनरी की सहायता ली गई। बचावकर्मियों का प्रयास था कि जल्द से जल्द दोनों कर्मचारियों तक पहुंचा जा सके।
करीब पांच से छह घंटे तक खोज और बचाव अभियान जारी रहा। इस दौरान घटनास्थल पर पुलिस, दमकलकर्मी और मिल के कर्मचारी मौजूद रहे। आखिरकार राहत दलों ने मलबे के नीचे से दोनों कर्मचारियों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
दोनों शवों को पुलिस के सुपुर्द किया गया। इसके बाद पोस्टमार्टम सहित आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए।
इस हादसे के बाद शुगर मिल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दुर्घटनाग्रस्त पानी के टैंक की कुछ समय पहले मरम्मत की गई थी। यदि यह जानकारी सही है, तो जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि मरम्मत के बावजूद टैंक किस कारण से गिर गए।
हालांकि, टैंक गिरने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसा संरचनात्मक कमजोरी, तकनीकी खराबी, रखरखाव में कमी या किसी अन्य वजह से हुआ। किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही तय करने से पहले तकनीकी जांच आवश्यक होगी।
शुगर मिलों में पानी के बड़े टैंकों का इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है। गर्म और ठंडे पानी के भंडारण से जुड़ी संरचनाओं को सुरक्षित बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। इनमें किसी प्रकार की तकनीकी खराबी या ढांचागत कमजोरी कर्मचारियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
औद्योगिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से ऐसे टैंकों की नियमित जांच, मरम्मत और उनकी मजबूती का आकलन महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से पुराने या मरम्मत किए गए टैंकों के मामले में उनकी भार सहने की क्षमता तथा सहायक संरचनाओं की स्थिति पर ध्यान देना आवश्यक होता है।
दुर्घटना के बाद स्थानीय स्तर पर मिल प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में कर्मचारियों की सुरक्षा और टैंक के रखरखाव को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, मिल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण की पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस हादसे ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है। बड़े कारखानों और मिलों में भारी मशीनों, पाइपलाइनों तथा पानी के विशाल भंडारण टैंकों के आसपास काम करने वाले कर्मचारियों को कई प्रकार के जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे प्रतिष्ठानों में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण होता है। दुर्घटना होने पर समय पर बचाव कार्य शुरू करना और प्रभावित कर्मचारियों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दादरिया की इस घटना में राहत दलों को दोनों कर्मचारियों तक पहुंचने के लिए कई घंटे संघर्ष करना पड़ा। इससे स्पष्ट होता है कि भारी औद्योगिक संरचनाओं के गिरने की स्थिति में बचाव कार्य कितना जटिल हो सकता है।
फिलहाल इस दुर्घटना में दो कर्मचारियों की मौत की पुष्टि हुई है। घटना ने मृतकों के परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। अब इस हादसे के कारणों और शुगर मिल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।





