गुजरात

गुजरात में 'पिछड़ा वोट बैंक' तय करते हैं चुनाव में सरकार की दशा और दिशा, जानें

Renuka Sahu
23 March 2022 5:51 AM GMT
गुजरात में पिछड़ा वोट बैंक तय करते हैं चुनाव में सरकार की दशा और दिशा, जानें
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फाइल फोटो 

गुजरात में में साल 2022 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछ चुकी हैं.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। गुजरात (Gujarat) में में साल 2022 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव (2022 Assembly Election) की सियासी बिसात बिछ चुकी हैं. वहीं, राज्य की सत्ता पर पिछले 25 सालों से बीजेपी का कब्जा बना हुआ है .जबकि 27 सालों से कांग्रेस गुजरात (Gujarat Congress) की सत्ता से दूर है .जबकि 1995 तक कांग्रेस गुजरात पर एक छत्र राज कर चुकी है. गुजरात की राजनीति में जातिगत समीकरण के बड़े मायने हैं. राज्य की 6 करोड़ की आबादी में से 52 फ़ीसदी पिछड़ा वर्ग की आबादी है. वहीं, प्रदेश में 146 जातियां OBC समुदाय में आती है . ऐसे में पिछड़ा वर्ग की यह जातियां ही तय करती है किस सत्ता पर कौन काबिज होगा.

दरअसल, प्रदेश में सवर्ण मतदाताओं की आबादी सबसे कम है. वहीं, दूसरी तरफ राज्य में पटेल समुदाय की आबादी 16 फीसदी है लेकिन यह जाति सबसे ज्यादा ताकतवर मानी जाती है. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में गुजरात में 52 फ़ीसदी पिछड़ा वर्ग की जातियों को साधने के लिए बीजेपी और कांग्रेस अपनी-अपनी तरीके से कोशिशों में जुट गए हैं.
गुजरात राज्य का जातिगत समीकरण
वहीं, गुजरात का जातिगत समीकरण दूसरे राज्यों से बिल्कुल अलग है. इस राज्य में पिछड़ी जातियों की सबसे ज्यादा अधिकता है. राज्य की जनसंख्या में 52 फीसदी मतदाता पिछड़ा वर्ग की 146 जातियों से ही आते हैं. जबकि 16 फ़ीसदी पाटीदार समुदाय जोकि सामान्य जाति से है.वहीं 16 फ़ीसदी के करीब क्षत्रिय समुदाय की आबादी मानी जाती है. हालांकि, प्रदेश में दलित आबादी केवल 7 फ़ीसदी है.
जानिए राज्य में जातिगत आबादी का प्रतिशत?
गुजरात में अगर जातिगत आबादी की बात करें तो ओबीसी 52% है, वहीं, क्षत्रिय -16%, पाटीदार -16%, दलित -7%,, आदिवासी -11%, मुस्लिम-9%. इसके अलावा अगर सामान्य जातियों की बात करे. जिसमें ब्राह्मण ,बनिया, कायस्थ महज पूरे प्रदेश में 5% है.
पिछड़ी जातियों पर BJP ने बनाए हुए है विशेष नजर
बता दें कि प्रदेश में पिछड़ी जातियों पर बीजेपी अपनी विशेष नजर बनाए हुए है. वहीं, राज्य की जनसंख्या का 52 फ़ीसदी आबादी पिछड़ी जाति का ही है. इसी वजह से इस जाति समुदाय में बीजेपी ने विशेष पकड़ बनाने के लिए काफी प्रयासरत है. हालांकि, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) खुद अपने को ओबीसी समुदाय का बताते हैं. वहीं, गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) गुजरात चुनाव (Gujarat Election) को लेकर अब गंभीर हो गए हैं. इसलिए राज्य के जातिगत समीकरण को साधने के लिए बीजेपी ने रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है.
गुजरात में OBC समुदाय को लेकर कांग्रेस का प्लान
गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने ओबीसी समुदाय को लेकर विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं. जहां पर पिछले 27 सालों से सत्ता के वनवास को खत्म करने के लिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरीके से जुट चुका है. ऐसे में कांग्रेस के पिछड़े वर्ग के बड़े नेता जगदीश ठाकोर और सुखराम राठवा को विशेष जिम्मेदारी भी दी गई है. इन अनुभवी नेताओं के तजुर्बे को ध्यान में रखते हुए सियासी समीकरण को साधने की कोशिश में कांग्रेस जुट गई है. वहीं, गुजरात की सियासत में जगदीश ठाकोर की पहचान एक तेजतर्रार नेता के रूप में होती है. कांग्रेस गुजरात में सत्ता पर वापसी के लिए ओबीसी दलित और आदिवासी वोट बैंक पर फोकस कर रही है. इसी वजह से 2022 के चुनाव से ठीक पहले ही जगदीश ठाकोर को कांग्रेस ने कमान सौंपी है. जबकि आदिवासी वोटों के लिए सुखराम राठवा पर विश्वास जताया है.
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