गुजरात

आखिरी सांस तक करूंगा देशवासियों की सेवा, पीएम मोदी का संकल्प

Ratna Netam
30 Oct 2026 2:04 PM IST
आखिरी सांस तक करूंगा देशवासियों की सेवा, पीएम मोदी का संकल्प
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि उनका जीवन देशवासियों की सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने इस भावना पर जोर दिया कि जनसेवा ही राष्ट्रसेवा का सबसे प्रभावी माध्यम है। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों के कल्याण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल करने पर लगातार जोर दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सेवा को राजनीति का मूल उद्देश्य बताया है। उनका मानना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता की अपेक्षाओं को समझना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने कई अवसरों पर कहा है कि सरकार का काम केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उन नीतियों का वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।
प्रधानमंत्री का जनसेवा को लेकर यह दृष्टिकोण उनके लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन का प्रमुख हिस्सा रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने के बाद वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने वाले नरेंद्र मोदी ने अपने शासनकाल में विकास, सुशासन और जनकल्याण को महत्वपूर्ण विषयों के रूप में प्रस्तुत किया है। अक्टूबर 2026 में उन्होंने शासन प्रमुख के रूप में अपने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में उनके सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के सफर को लेकर कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधनों में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में सरकार की सफलता का मूल्यांकन आम नागरिकों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों से होना चाहिए। उन्होंने गरीबों को आवास उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सड़क और डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता को सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल किया है।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री जनधन योजना जैसी पहलें इसी जनकल्याणकारी दृष्टिकोण का हिस्सा रही हैं। सरकार का उद्देश्य इन योजनाओं के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ना है। हालांकि, योजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन उनके क्रियान्वयन, लाभार्थियों तक पहुंच और जमीनी स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों के आधार पर भी किया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के सशक्तीकरण को भी देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया है। अप्रैल 2026 में नई दिल्ली में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार महिलाओं के जीवन के विभिन्न चरणों में सहायता पहुंचाने के लिए योजनाएं संचालित कर रही है। इस दौरान उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी पहलों का उल्लेख किया था।
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक संदेशों में युवाओं की भूमिका भी प्रमुखता से सामने आती रही है। उनका मानना है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, तकनीक और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। स्टार्टअप, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर सरकार जोर देती रही है।
ग्रामीण भारत के विकास को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। उन्होंने किसानों की आय, कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधार, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और गांवों में सुविधाओं के विस्तार को व्यापक विकास प्रक्रिया से जोड़कर देखा है। उनका मानना है कि जब गांव मजबूत होंगे, तभी देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था अधिक सशक्त बन सकेगी।
प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक संदेशों में 'विकसित भारत' का संकल्प विशेष स्थान रखता है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सामने रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग जगत, युवाओं तथा आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी को आवश्यक बताया है।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से जनसेवा का यह संदेश प्रधानमंत्री मोदी की उस सार्वजनिक छवि से भी जुड़ा है, जिसमें वे स्वयं को जनता के प्रति जवाबदेह जनप्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, विपक्षी दल केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों, बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के दावों और उनके वास्तविक परिणामों का मूल्यांकन भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित, कर्तव्य और सेवा की भावना को महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक अपने कार्य, अनुशासन और सामाजिक योगदान से इसमें भूमिका निभा सकता है।
जनसेवा और राष्ट्रसेवा को एक-दूसरे से जोड़ने वाला प्रधानमंत्री का संदेश इस विचार को सामने रखता है कि देश की प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण आधार नागरिकों का कल्याण है। इस दृष्टिकोण में शासन की सफलता का वास्तविक पैमाना आम लोगों के जीवन में सुधार, सुविधाओं की उपलब्धता और विकास के अवसरों तक समान पहुंच है।
संपादकीय सत्यापन नोट: 'आखिरी सांस तक लोगों की सेवा में समर्पित रहेंगे' वाला सटीक बयान किस तारीख और कार्यक्रम में दिया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए खबर में इसे किसी विशेष कार्यक्रम का सत्यापित प्रत्यक्ष उद्धरण नहीं बताया गया है।
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