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Gandhinagar गांधीनगर। देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय बैठक 17 फरवरी को गुजरात के गांधीनगर में आयोजित की जाएगी। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इस बैठक में सहकारिता क्षेत्र में चल रहे प्रमुख सुधारों और विस्तार योजनाओं की समीक्षा की जाएगी, जिसमें देशभर में दो लाख नई सहकारी समितियों की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल है। ‘मंथन बैठक’ की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में करेंगे। बैठक में विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
अधिकारियों के अनुसार, बैठक में सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और क्षेत्र के लिए समन्वित रोडमैप पर चर्चा होगी। यह मंच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का अवसर भी देगा। बैठक के मुख्य एजेंडे में दो लाख नई बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (एमपीएसीएस), डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की योजना शामिल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण ऋण प्रणाली को मजबूत करना और कृषि व संबद्ध क्षेत्रों में सेवा वितरण में सुधार करना है।
अनाज भंडारण पहल के तहत आधुनिक वेयरहाउस के राष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार की भी समीक्षा की जाएगी। इस दौरान भंडारण क्षमता बढ़ाने, मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर चर्चा होगी। बैठक में राज्यों की भागीदारी तीन नवगठित राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं- नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड में सुनिश्चित करने पर भी विचार होगा। इन संस्थाओं का उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देना, जैविक खेती को प्रोत्साहित करना और गुणवत्तापूर्ण बीजों की आपूर्ति को सुव्यवस्थित करना है।
इसके अलावा, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप राज्य सहकारिता कानूनों में संशोधन, सहकारी चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने के उपाय, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से डेयरी क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। बैठक के एजेंडे में दाल और मक्का उत्पादन को बढ़ावा देना, सहकारी बैंकों की चुनौतियों का समाधान, साझा सेवा इकाइयों और अम्ब्रेला संरचनाओं को मजबूत करना, सदस्यता विस्तार और जागरूकता अभियान चलाना तथा मीडिया पहुंच को बेहतर बनाना भी शामिल है।
साथ ही प्राथमिक कृषि ऋण समितियों और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस के उपयोग, मानव संसाधन विकास और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की जाएगी, ताकि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
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