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Gujarat गुजरात: अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को नया impulso देते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने INOXGFL ग्रुप की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस परियोजना में 3 GW का सोलर मॉड्यूल संयंत्र बवला में और 1.2 GW का विंड नासेल और हब यूनिट कल्याणगढ़ में शामिल है। उद्घाटन अवसर पर हर्ष संघवी ने कहा कि यह पहल न केवल राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय रोजगार और उद्योगों के लिए नए अवसर भी उत्पन्न करेगी। उन्होंने कहा, "गुजरात राज्य अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी रहा है, और INOXGFL जैसी कंपनियों की यह परियोजना इसे और मजबूती प्रदान करेगी। यह संयंत्र पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में बड़ा कदम है।"
INOXGFL ग्रुप की यह परियोजना भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी। 3 GW सोलर मॉड्यूल प्लांट बवला में स्थापित किया गया है, जो भारत के सबसे बड़े सोलर मॉड्यूल उत्पादन केंद्रों में से एक है। इस संयंत्र में नवीनतम तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। कल्याणगढ़ में स्थापित 1.2 GW विंड नासेल और हब यूनिट का उद्देश्य विंड टर्बाइन के उत्पादन को और उन्नत करना है। इस यूनिट में टर्बाइन ब्लेड, नासेल और हब के निर्माण की पूरी प्रक्रिया आधुनिक तकनीक के साथ होगी। INOXGFL के अधिकारियों के अनुसार, यह यूनिट भारत में घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता को भी कम करेगी।
इस परियोजना का राज्य अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय मजदूरों और इंजीनियरों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार की ग्रीन एनर्जी और कार्बन न्यूट्रल पहल को भी यह परियोजना मजबूती प्रदान करेगी। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने उद्घाटन के दौरान कहा, "यह परियोजना गुजरात को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अक्षय ऊर्जा उत्पादन के केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। हमारी कोशिश है कि राज्य में हर जिले तक नवीकरणीय ऊर्जा का लाभ पहुंचे।"
INOXGFL ग्रुप के सीईओ ने कहा कि इस परियोजना में भारी निवेश किया गया है और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी राज्य में और भी सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को स्थानीय उत्पादन के माध्यम से पूरा किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की परियोजनाएं भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन 2030 को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगी। बवला और कल्याणगढ़ संयंत्रों की उत्पादन क्षमता न केवल राज्य की बिजली जरूरत को पूरा करेगी, बल्कि देश के अक्षय ऊर्जा नेटवर्क को भी सुदृढ़ करेगी। अखिरकार, इस उद्घाटन से स्पष्ट संदेश गया कि गुजरात राज्य और भारत देश नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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