
Gujarat गुजरात: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को गुजरात के सासन गिर में आयोजित इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) समिट-2026 के पहले प्री-इवेंट में भारत की वन्यजीव विविधता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुनिया में पाई जाने वाली सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों में से पांच भारत में पाई जाती हैं, जो देश के लिए गर्व की बात है।
यह कार्यक्रम शेर संरक्षण और अन्य बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इसे केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने IBCA के पहले वैश्विक समिट से पहले आयोजित किया है। यह समिट 1 और 2 जून को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
भूपेंद्र यादव ने बताया कि इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस की शुरुआत वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में की गई थी, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में वन्यजीव संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से बाघ, शेर और अन्य बड़ी बिल्लियों की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला IBCA समिट दुनिया भर के नेताओं, वन्यजीव विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाएगा, जहां प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने पर विस्तृत चर्चा होगी।
दुनिया में सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों में बाघ, शेर, तेंदुआ, स्नो लेपर्ड, चीता, जगुआर और प्यूमा शामिल हैं, जो कुल 55 देशों में पाई जाती हैं। इनमें से भारत में बाघ, शेर, तेंदुआ, स्नो लेपर्ड और चीता मौजूद हैं, जो देश की जैव विविधता को वैश्विक स्तर पर विशेष पहचान देते हैं।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत न केवल इन प्रजातियों का घर है, बल्कि इनके संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार वन्यजीव संरक्षण को लेकर लगातार नई नीतियां और योजनाएं लागू कर रही है, जिससे इन प्रजातियों की आबादी और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जा सके।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि बड़ी बिल्लियों का संरक्षण पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।





