गुजरात
Gujarat एनकाउंटर मामला, हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला, 22 आरोपी बरी
Ratna Netam
7 May 2026 7:20 PM IST

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Ahmedabad.अहमदाबाद: गुजरात के सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में अहम फैसला सामने आया है। गुजरात हाईकोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को बरी करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला दो दशक से ज्यादा समय से चर्चा में रहा और इसकी सुनवाई कई वर्षों तक चली।
सोहराबुद्दीन शेख और उसके साथी ताजुद्दीन हुसैन की 2005 में एनकाउंटर में हत्या के बाद इस मामले ने पूरे देश में राजनीतिक और कानूनी हलचल मचाई थी। आरोप था कि ये एनकाउंटर फर्जी था और इसमें कई अधिकारियों की संलिप्तता थी। निचली अदालत ने लंबे समय तक चलने वाली सुनवाई के बाद 2012 में सभी आरोपियों को बरी किया था। इसके खिलाफ राज्य और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अपील दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सबूत और गवाहों के बयान मामलों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं था कि सभी आरोपी इस एनकाउंटर में जानबूझकर किसी अवैध कार्य में शामिल थे। अदालत ने सभी आरोपियों की सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।
सोहराबुद्दीन और ताजुद्दीन के एनकाउंटर के बाद कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, राजनीतिक नेता और अन्य सरकारी कर्मियों को इस मामले में आरोपी बनाया गया था। इसमें तत्कालीन गुजरात पुलिस के अधिकारियों के साथ-साथ कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। आरोपियों में कई उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और राजनीतिक हस्तियां शामिल थीं।
विशेष जांच दल (CBI) ने मामले की जांच कई सालों तक की और अदालत में प्रस्तुत किए गए सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर मुकदमे की सुनवाई की। हालांकि, अदालत ने यह माना कि जांच में सामने आए सबूत पर्याप्त नहीं थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी दृष्टिकोण से सभी आरोपियों को निर्दोष माना जाना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में इस फैसले पर तुरंत प्रतिक्रिया आई। विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा कि इससे कानून की शक्ति और न्याय प्रक्रिया पर भरोसा प्रभावित हो सकता है। वहीं, समर्थक दलों ने इसे न्यायपूर्ण निर्णय करार दिया और कहा कि यह निर्णय सही कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले का यह फैसला देश में फर्जी एनकाउंटर और पुलिस कार्रवाई के मामलों में महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाएगा। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी आरोपी बिना ठोस सबूत के दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
इस फैसले से अब मामले का लंबित विवाद खत्म हो गया है। अदालत ने सभी 22 आरोपियों को कानूनी रूप से निर्दोष घोषित करते हुए उन्हें सभी तरह के आरोपों से मुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद, मामले के सभी पक्षों को अपने राजनीतिक और कानूनी कदमों को फिर से विचार करने का अवसर मिलेगा।
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