
Gujarat गुजरात: गुजरात के गिर जंगलों से सामने आई आठ एशियाई शेर शावकों की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण विशेषज्ञों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। इस घटना के बाद दुनिया की एकमात्र जंगली एशियाई शेर आबादी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, इन शावकों की मौत का प्रमुख कारण अत्यधिक गर्मी, तनाव और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता बताया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बदलते मौसम और प्राकृतिक दबावों के कारण शावकों की सेहत पर असर पड़ा, जिससे उनकी मृत्यु हुई।
गिर जंगल एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास माना जाता है, जहां इनकी पूरी जंगली आबादी संरक्षित है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की जनहानि संरक्षण प्रयासों के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि एशियाई शेरों की आबादी धीरे-धीरे बढ़ रही है और ऐसे में स्वास्थ्य प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और भी जरूरी हो गया है।
गौरतलब है कि एक सदी पहले एशियाई शेर लगभग विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए थे। इसके बाद शुरू हुए संरक्षण प्रयासों ने इनकी संख्या में उल्लेखनीय सुधार किया है। वर्ष 2015 में इनकी संख्या 523 थी, जो जनवरी 2026 तक बढ़कर 891 तक पहुंच गई है।
इस बढ़ोतरी को दुनिया के सबसे सफल वन्यजीव संरक्षण अभियानों में शामिल किया जाता है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इस सफलता के बीच नई चुनौतियों की ओर ध्यान खींचा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी के साथ-साथ गर्मी, बीमारियों और प्राकृतिक दबावों से निपटने के लिए अधिक मजबूत निगरानी और स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता है।
फिलहाल वन विभाग इस पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।





