गुजरात

Gujarat : पहले दो रबर डैम का निर्माण, सिंचाई और जल प्रबंधन व्यवस्था होगी मजबूत

Kavita2
6 July 2026 3:04 PM IST
Gujarat : पहले दो रबर डैम का निर्माण, सिंचाई और जल प्रबंधन व्यवस्था होगी मजबूत
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Gujarat गुजरात: सरकार राज्य में अपने पहले दो हवा से भरे रबर डैम (Rubber Dam) बनाने की दिशा में काम कर रही है। इन परियोजनाओं में दक्षिण कोरियाई रबर ब्लैडर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सिंचाई, भूजल पुनर्भरण और बाढ़ प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने की उम्मीद है।

इन परियोजनाओं के तहत दो प्रमुख रबर डैम का निर्माण किया जा रहा है। पहला डैम हेरान नदी पर छोटा उदयपुर जिले के बोडेली तालुका में स्थित राजवासना रबर डैम है। दूसरा प्रोजेक्ट तापी जिले के डोलवन तालुका में अंबिका नदी पर बनने वाला पाठकवाड़ी रबर डैम है।

इन दोनों परियोजनाओं में कुल मिलाकर 162 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि इन डैमों के निर्माण से दूरदराज के क्षेत्रों में जल संसाधन प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी और कृषि क्षेत्र को सीधा लाभ पहुंचेगा।

गुजरात सरकार के अनुसार, यह परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन’ अभियान के अनुरूप तैयार की जा रही हैं, जिसका उद्देश्य वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना और जल संरक्षण के आधुनिक तरीकों को अपनाना है।

राजवासना रबर डैम का निर्माण लगभग 82.97 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह परियोजना 30 महीने की निर्माण अवधि में पूरी होने की योजना है और सितंबर 2027 तक इसके पूरा होने की संभावना जताई गई है।

अधिकारियों के अनुसार, इन रबर डैमों की विशेषता यह है कि इनमें रबर ब्लैडर तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे जल स्तर को नियंत्रित करना आसान होता है। आवश्यकता पड़ने पर डैम को फुलाया या खाली किया जा सकता है, जिससे जल प्रबंधन अधिक लचीला और प्रभावी बनता है।

भूजल पुनर्भरण के क्षेत्र में भी इन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन डैमों से आसपास के क्षेत्रों में जल स्तर बढ़ेगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।

इसके अलावा, इन डैमों से बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलने की उम्मीद है। मानसून के दौरान अचानक बढ़ने वाले जल प्रवाह को नियंत्रित करके यह परियोजनाएं निचले इलाकों में होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक होंगी।

छोटा उदयपुर और तापी जिला जैसे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में यह परियोजनाएं विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। यहां लंबे समय से सिंचाई और पेयजल की समस्या बनी हुई थी।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद स्थानीय कृषि उत्पादन में सुधार होगा और किसानों की आय में वृद्धि की संभावना भी बढ़ेगी। साथ ही, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि रबर डैम तकनीक पारंपरिक बांधों की तुलना में अधिक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल होती है। इसे कम समय में बनाया जा सकता है और इसका रखरखाव भी अपेक्षाकृत आसान होता है।

कुल मिलाकर, गुजरात में शुरू की गई ये रबर डैम परियोजनाएं राज्य के जल प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही हैं।

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