गुजरात

बिलिमोरा में सोमनाथ महादेव मंदिर में हर साल आयोजित घेरैया नृत्य महोत्सव

SHIDDHANT
26 Oct 2025 10:24 PM IST
बिलिमोरा में सोमनाथ महादेव मंदिर में हर साल आयोजित घेरैया नृत्य महोत्सव
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Gujrat गुजरात: सोमनाथ महादेव मंदिर और ट्रेहंगे निलकार्ट ट्रस्ट, बिलिमोरा के सहयोग से हर साल आयोजित घेरैया नृत्य महोत्सव ने इस बार भी दर्शकों का मन मोह लिया। आयोजनकर्ता देवचंदभाई ढेरैया ने बताया कि इस महोत्सव का आयोजन कर्मिक माह के पांचवें दिन किया जाता है। इस दिन आसपास के क्षेत्रों के विभिन्न घेरैया समूह अपनी पारंपरिक पोशाकों में प्रस्तुति देते हैं। देवचंदभाई ढेरैया ने कहा, "हम हर साल इस महोत्सव का आयोजन करते हैं ताकि हमारी जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर युवा पीढ़ी तक पहुँच सके। इस महोत्सव के माध्यम से हम लोक कला और पारंपरिक नृत्यों को संरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवा कलाकारों को मंच प्रदान करने और उन्हें लोक कला के महत्व को समझाने का भी एक जरिया है।

महोत्सव में भाग लेने वाले समूहों ने संगीत, ढोलक और पारंपरिक गीतों के साथ अपनी कलात्मक प्रस्तुति दी। दर्शक कलाकारों की तालमेल, ऊर्जा और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। आयोजन स्थल पर प्रशासन ने सुरक्षा और स्वच्छता के लिए भी विशेष इंतजाम किए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से लोक संस्कृति और जनजातीय परंपराओं को बनाए रखना संभव होता है। यह न केवल कलाकारों को पहचान देता है बल्कि सांस्कृतिक शिक्षा का भी माध्यम बनता है। युवा दर्शक इस तरह के कार्यक्रमों से प्रेरित होते हैं और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव महसूस करते हैं।

स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही महोत्सव में शामिल होकर कलाकारों की प्रशंसा कर रहे थे। महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक स्टाल और स्थानीय हस्तशिल्प भी प्रदर्शित किए गए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिला। देवचंदभाई ढेरैया ने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य इस महोत्सव के जरिए जनजातीय कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना और उन्हें उत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों को और बढ़ावा दिया जाएगा और अधिक युवा कलाकारों को मंच प्रदान किया जाएगा। कुल मिलाकर, नवसारी के बिलिमोरा में आयोजित यह घेरैया नृत्य महोत्सव दक्षिण गुजरात की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और लोक कला को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। इस आयोजन ने यह दिखाया कि सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक कला को सुरक्षित रखना युवाओं और स्थानीय समुदाय के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
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