
गुजरात : दाहोद जिले में एक BJP विधायक के बंगले को धोने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ी का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने नाराजगी जताई। वीडियो में देवगढ़ बारिया नगरपालिका की फायर इंजन को धनपुर तालुका में BJP विधायक बचूभाई खाबड़ के घर के पास बंगले के आसपास पानी की बौछार करते देखा गया।
फायर ब्रिगेड की गाड़ी आम तौर पर आग लगने, बचाव कार्य और अन्य आपात परिस्थितियों में इस्तेमाल की जाती है। ऐसे में निजी संपत्ति की सफाई के लिए इसका इस्तेमाल किए जाने का वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठने लगे।
#WATCH | Dahod, Gujarat: A controversy has erupted in Dahod district after an emergency fire tender was allegedly deployed to wash the bungalow of Devgadh Baria MLA and former minister Bachubhai Khabad. A video of the incident has gone viral on social media. After the matter came to light, a fee of ₹2,700 was collected from MLA Bachubhai Khabad. (05.10) (Visuals from Bachubhai Khabad's house and local fire station)
— ANI (@ANI) October 6, 2026
मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आया। फायर इंजन के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर विधायक बचूभाई खाबड़ पर 2,700 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
वीडियो में साफ दिखाई देता है कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी से बंगले के आसपास पानी छोड़ा जा रहा है। यह दृश्य सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे सरकारी संसाधनों के अनुचित इस्तेमाल से जोड़कर देखा।
सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि जिस वाहन का इस्तेमाल आपातकालीन सेवाओं के लिए होना चाहिए, उसे निजी काम में क्यों लगाया गया। लोगों का कहना था कि ऐसी गाड़ियां हर समय आग या अन्य संकट की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहनी चाहिए।
देवगढ़ बारिया नगरपालिका की फायर ब्रिगेड की यह गाड़ी धनपुर तालुका तक कैसे पहुंची और इसके इस्तेमाल की अनुमति किस स्तर पर दी गई, इसे लेकर भी सवाल उठे।
वीडियो वायरल होने के बाद मामले की जांच की गई और फायर इंजन के इस्तेमाल को गलत मानते हुए जुर्माने की कार्रवाई की गई।
हालांकि 2,700 रुपये का जुर्माना लगाए जाने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने जुर्माने की राशि को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकारी संसाधन के निजी उपयोग पर अधिक सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। आम लोगों का कहना है कि फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवा का निजी उपयोग केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि किसी वास्तविक आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है।
यदि उसी समय किसी क्षेत्र में आग लग जाती और फायर ब्रिगेड की गाड़ी निजी काम में लगी होती तो राहत कार्य में देरी हो सकती थी।
फायर ब्रिगेड की गाड़ियां नगरपालिकाओं के महत्वपूर्ण आपात संसाधनों में शामिल होती हैं। इनमें बड़ी मात्रा में पानी, दमकल उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद रहते हैं।
इनका मुख्य उद्देश्य आग बुझाना और संकट की स्थिति में लोगों की जान-माल की रक्षा करना होता है। इसलिए इनके उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम और प्राथमिकताएं तय रहती हैं।
बंगले की सफाई के लिए इस तरह के वाहन के इस्तेमाल ने इन्हीं नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या नगरपालिका अधिकारियों को इस बारे में पहले से जानकारी थी या फायर इंजन को बिना औपचारिक अनुमति के वहां भेजा गया था।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विधायक पर 2,700 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आगे किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है या नहीं, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है।
इस पूरे मामले में विधायक बचूभाई खाबड़ की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, यह भी सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण मामला तेजी से राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।
विपक्षी दल या स्थानीय राजनीतिक विरोधी इस मुद्दे को प्रशासनिक संसाधनों के दुरुपयोग से जोड़ सकते हैं, लेकिन फिलहाल मुख्य तथ्य यही है कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी से निजी बंगले के आसपास पानी की बौछार की गई और इसके बाद जुर्माना लगाया गया।
मामले ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले वीडियो कई बार प्रशासनिक कार्रवाई का आधार बन जाते हैं।
यदि यह वीडियो सामने नहीं आता तो संभव है कि यह घटना इतनी चर्चा में नहीं आती। वायरल होने के बाद सार्वजनिक दबाव बढ़ा और संबंधित मामले पर कार्रवाई करनी पड़ी।
दाहोद जिले में यह घटना अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि सरकारी वाहनों और संसाधनों का इस्तेमाल केवल सार्वजनिक हित के लिए होना चाहिए।
ऐसी घटनाओं से प्रशासन की छवि प्रभावित होती है और जनता में यह संदेश जाता है कि प्रभावशाली लोगों के लिए नियम अलग हो सकते हैं।
इसीलिए कई लोगों ने इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग भी की है।
फायर ब्रिगेड विभाग और नगरपालिका के स्तर पर अब यह देखना जरूरी होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इसके लिए सरकारी वाहनों की आवाजाही और उपयोग का रिकॉर्ड और सख्ती से रखा जा सकता है।
फायर इंजन को स्टेशन से बाहर भेजने से पहले स्पष्ट कारण और अनुमति दर्ज करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।
गुजरात के दाहोद में सामने आए इस मामले ने सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल वीडियो वायरल होने के बाद विधायक बचूभाई खाबड़ पर 2,700 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अब सवाल यह है कि प्रशासन इस मामले से क्या सबक लेता है और भविष्य में आपातकालीन सेवाओं के निजी इस्तेमाल को रोकने के लिए कितनी सख्ती बरती जाती है।





