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Gujrat गुजरात: एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में पर्यटन मंत्रालय ‘भारत पर्व 2025’ का आयोजन कर रहा है। यह पहली बार है जब यह आयोजन दिल्ली से बाहर अन्य राज्य में हो रहा है। इसका आयोजन गुजरात सरकार के सहयोग से हो रहा है, जिसके अंतर्गत विभिन्न राज्यों के दिवस समारोह मनाए जा रहे हैं। इन्हीं समारोहों की श्रृंखला में सोमवार को विशेष रूप से ‘दिल्ली दिवस’ मनाया गया। दिल्ली के कलाकारों को प्रोत्साहित करने और दिल्ली की सांस्कृतिक प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा गुजरात पहुंचे। इस अवसर पर दिल्ली से 65 कलाकारों का दल भी ‘भारत पर्व 2025’ में शामिल हुआ, जिन्होंने संगीत, नृत्य, लोककला और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से राजधानी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया। इस मौके पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी उपस्थित रहे।
दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने ‘भारत पर्व 2025’ के तहत स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर आयोजित ‘दिल्ली दिवस’ के अवसर पर शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम में शामिल विभिन्न विधाओं के दिल्ली के प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रोत्साहित किया, जिन्होंने संगीत, नृत्य, लोककला और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से राजधानी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। यह संस्करण विशेष रूप से भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती को समर्पित है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता के आदर्शों ने जिस सशक्त भारत की नींव रखी, ‘भारत पर्व 2025’ उसी भावना को जीवंत करता है। कपिल मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा, “भारत पर्व केवल संस्कृति का उत्सव नहीं, बल्कि यह एकता, गर्व और पहचान का प्रतीक है। दिल्ली के कलाकारों के लिए यह अवसर पूरे देश के सामने अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का एक गौरवपूर्ण मंच है।”
कपिल मिश्रा ने आगे कहा कि दिल्ली देश का दिल है- यहां की कला, संगीत और परंपरा पूरे भारत की विविधता को अपने में समेटे हुए हैं। जब हमारे कलाकार गुजरात जैसे ऐतिहासिक स्थल पर प्रदर्शन करते हैं तो यह सिर्फ सांस्कृतिक आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भावनात्मक एकता का भी उत्सव बन जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा की उपस्थिति ने दिल्ली दिवस के उत्सव को और भी भव्य और अविस्मरणीय बना दिया। ऐसे आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का उत्सव हैं, बल्कि उस अदृश्य सूत्र का प्रतीक भी हैं जो पूरे देश को एकता के बंधन में जोड़ता है।
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