गुजरात
भावनगर में उद्योग जगत से मिले CM भूपेंद्र पटेल सरल नियमों की बताई जरूरत
Ratna Netam
25 Sept 2026 7:26 PM IST

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भावनगर। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भावनगर में शिप रीसाइक्लिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण और सरल प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना और सेवा के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेते हुए गुजरात सरकार जनसेवा और औद्योगिक विकास की दिशा में लगातार काम कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों और उद्योगों के लिए कामकाज को आसान बनाने के लिए कानूनों, नीतियों और नियमों को सरल और व्यावहारिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के क्षेत्र में गुजरात की मजबूत स्थिति को बनाए रखने के लिए लगातार सुधार कर रही है। राज्य में निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर कम लगाने पड़ें और मंजूरी की प्रक्रिया अधिक सुगम हो, इसके लिए सिंगल विंडो जैसी व्यवस्थाओं पर भी सरकार ने जोर दिया है।
भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए ‘वाइब्रेंट गुजरात’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में शुरू की गई इस पहल ने समय के साथ गुजरात को वैश्विक निवेश और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में स्थापित करने में मदद की है। राज्य सरकार अब इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए निवेश और औद्योगिक विस्तार को प्रोत्साहित कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वाइब्रेंट गुजरात आयोजनों में भाग लेने वाले उद्योगों और निवेशकों के लिए सरल तथा सुविधाजनक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। उनका कहना था कि उद्योगों को नीतिगत स्थिरता और प्रशासनिक सुविधा मिलने से निवेश का वातावरण मजबूत होता है और रोजगार के नए अवसर तैयार करने में भी मदद मिलती है।
गुजरात सरकार ने 2026 में वाइब्रेंट गुजरात के क्षेत्रीय सम्मेलनों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की कोशिश की है। जून में वडोदरा में आयोजित चौथे वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य सरकार ने बताया था कि इससे पहले आयोजित तीन क्षेत्रीय सम्मेलनों में 9,499 समझौता ज्ञापन हुए और करीब 13.30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए।भावनगर का यह कार्यक्रम शिप रीसाइक्लिंग उद्योग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। जिले का अलंग-सोसिया क्षेत्र भारत के जहाज पुनर्चक्रण उद्योग का प्रमुख केंद्र है। केंद्र सरकार के समुद्री क्षेत्र से जुड़े आधिकारिक पोर्टल के अनुसार अलंग में 150 शिप रीसाइक्लिंग प्लॉट हैं, जिनमें 128 परिचालन में हैं और 115 यार्ड हांगकांग कन्वेंशन के अनुरूप बताए गए हैं।जहाज पुनर्चक्रण उद्योग में पुराने जहाजों से बड़ी मात्रा में स्टील और अन्य उपयोगी सामग्री दोबारा प्राप्त की जाती है। केंद्र सरकार के अनुसार जहाज की करीब 97 से 98 प्रतिशत सामग्री को पुनर्प्राप्त किया जा सकता है। इस कारण यह उद्योग समुद्री अर्थव्यवस्था के साथ सर्कुलर इकोनॉमी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आधिकारिक आंकड़ों में भारत की वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण क्षमता में बड़ी हिस्सेदारी बताई गई है।
हाल के वर्षों में जहाज पुनर्चक्रण क्षेत्र में सुरक्षा और पर्यावरण मानकों को लेकर भी बदलाव हुए हैं। हांगकांग इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर द सेफ एंड एनवायरनमेंटली साउंड रीसाइक्लिंग ऑफ शिप्स जून 2025 में प्रभावी हुआ। इसके बाद सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल जहाज पुनर्चक्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का महत्व और बढ़ा है। गुजरात के अलंग के बड़ी संख्या में यार्ड इन मानकों के अनुरूप प्रमाणित किए गए हैं।गुजरात सरकार ने भी हाल में जहाज पुनर्चक्रण से संबंधित नियमों में बदलाव किया है। अगस्त 2026 में गुजरात मैरीटाइम बोर्ड ने जहाज पुनर्चक्रण प्लॉट के उपयोग की अनुमति से संबंधित नए नियम जारी किए, जिनमें लागू कानूनों, सुरक्षा, पर्यावरणीय मानकों और नियामकीय अनुपालन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कार्यक्रम में औद्योगिक विकास के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करना चाहती है जिसमें कारोबार करने वालों को अनावश्यक प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। राज्य सरकार का दावा है कि इसी उद्देश्य से विभिन्न मंजूरियों और प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात सरकार ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ जनहित और विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार का प्रयास है कि नीतियों में स्पष्टता रहे और उद्योगों को निवेश के लिए जरूरी सुविधाएं समय पर मिल सकें।
गुजरात में समुद्री अर्थव्यवस्था का महत्व भी बड़ा है। गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य के गैर-प्रमुख बंदरगाहों ने 484 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो संभाला और उनकी कुल क्षमता 608 मिलियन मीट्रिक टन रही। बोर्ड के अनुसार इसी अवधि में गुजरात के गैर-प्रमुख बंदरगाहों ने देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों द्वारा सामूहिक रूप से संभाले गए कार्गो के लगभग 53 प्रतिशत के बराबर माल संभाला।राज्य सरकार निवेश आकर्षित करने के साथ सर्कुलर इकोनॉमी पर भी जोर दे रही है। सितंबर 2026 में गांधीनगर में आयोजित वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम के दौरान मुख्यमंत्री पटेल ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बात कही थी। जहाज पुनर्चक्रण भी इसी सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल का हिस्सा है, क्योंकि पुराने जहाजों से प्राप्त स्टील और अन्य सामग्री को दोबारा उपयोग में लाया जाता है।
भावनगर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री का मुख्य संदेश उद्योगों के लिए सरल और सुविधाजनक व्यवस्था तैयार करने पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि आगामी वाइब्रेंट गुजरात आयोजनों में आने वाले उद्योगों और निवेशकों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का प्रयास होगा कि निवेश प्रक्रिया से जुड़ी व्यवस्थाएं आसान हों और उद्योगों को राज्य में अपनी परियोजनाएं आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल मिले।मुख्यमंत्री के संबोधन से यह भी स्पष्ट हुआ कि गुजरात सरकार औद्योगिक निवेश, समुद्री अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों को साथ लेकर आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। भावनगर और अलंग जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए सरकार की नीतियों का असर विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि जहाज पुनर्चक्रण उद्योग रोजगार, स्टील की पुनर्प्राप्ति और समुद्री अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है।
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