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Gandhinagar गांधीनगर। गुजरात में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) बढ़ाने के लिए एक व्यापक योजना के तहत जिलों में 8-10 हाई-टेक नर्सरियां विकसित करने और मैंग्रोव व घासभूमि (ग्रासलैंड) क्षेत्र को बढ़ाने की योजना है। यह जानकारी गांधीनगर में आयोजित दो दिवसीय वन विभाग की ‘चिंतन शिविर’ बैठक के समापन पर अधिकारियों ने दी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभावी शासन के लिए लगातार आत्म-मंथन बहुत जरूरी है और उन्होंने सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए तकनीक की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, "अच्छे शासन के लिए निरंतर आत्म-मंथन अत्यंत आवश्यक है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “तकनीक के माध्यम से सुशासन को एक नई दिशा दी है। पर्यावरण से जुड़ी प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए पटेल ने प्रधानमंत्री के ‘बैक टू बेसिक्स, बैक टू नेचर’ और ‘मिशन लाइफ’ के आह्वान का हवाला दिया और कहा कि पर्यावरण-केंद्रित जीवनशैली अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बढ़ता हुआ हरित क्षेत्र ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल से राज्य में पिछले 12 वर्षों में वन क्षेत्र के बाहर पेड़ों की संख्या में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बंजर भूमि पर पौधारोपण के लिए तकनीक का उपयोग करें और बताया कि लगातार प्रयासों से लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिससे वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण में अधिक भागीदारी हुई है। राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि राज्य पौधारोपण की सफलता दर बढ़ाने के लिए नर्सरी संस्कृति को प्राथमिकता देगा और अलग-अलग जिलों में 8 से 10 हाई-टेक नर्सरियां स्थापित करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि इनमें कृषि, बागवानी और वानिकी के पौधे शामिल होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वन विभाग का पहला ‘चिंतन शिविर’ 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था और वर्तमान अभ्यास को दूसरा बताया। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय विचार-विमर्श में वन अधिकारियों की क्षमता और प्रतिभा सामने आई है और इसके सुझावों को मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाएगा। मोढवाडिया ने कहा कि वन अधिकारियों ने वन भूमि को जिम्मेदारी के साथ संरक्षित किया है और औद्योगिक विकास तथा लंबी समुद्री तटरेखा के बावजूद गुजरात में मैंग्रोव वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने इको-टूरिज्म की संभावनाओं पर भी जोर दिया और कहा कि इसे मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप हरित क्षेत्र बढ़ाया जा सके। मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं और तकनीक के जरिए यह संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि गुजरात का वन क्षेत्र वर्तमान में 11 प्रतिशत है और इसे आधुनिक प्रबंधन के जरिए 13 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनोद राव ने बताया कि 10 सिफारिशें अंतिम रूप दी गई हैं, जिनमें एक लाख हेक्टेयर अतिरिक्त मैंग्रोव और एक लाख हेक्टेयर घासभूमि विकसित करने की योजना शामिल है। साथ ही अगले दो वर्षों में बाकी जिलों में सांस्कृतिक वन विकसित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ‘वन कवच’ मॉडल को 2035 तक 10,000 से 15,000 ग्राम पंचायतों तक बढ़ाया जाएगा और रोजगार बढ़ाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत इको-टूरिज्म नीति लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वन विभाग इन सिफारिशों को लागू करेगा और आने वाले वर्षों में परिणाम-आधारित कार्य करेगा।
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