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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस: गुजरात HC ने 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी

Kavita2
14 July 2026 10:30 AM IST
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस: गुजरात HC ने 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी
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अहमदाबाद : गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला एक बड़ी साजिश, बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने की मंशा और भारी संख्या में लोगों की जान जाने से जुड़ा है। कोर्ट ने इन परिस्थितियों को मौत की सजा की पुष्टि के प्रमुख आधारों में शामिल किया।

न्यायमूर्ति एवाई कोगजे और न्यायमूर्ति समीर दवे की खंडपीठ ने 7 जुलाई को दिए अपने फैसले में यह निर्णय सुनाया। अदालत ने 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को भी बरकरार रखा है। इन दोषियों की भूमिका को आतंकवादी गतिविधियों की साजिश और प्रशिक्षण से जुड़ा हुआ पाया गया।

गुजरात हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित और व्यापक साजिश थी। अदालत ने माना कि आरोपियों का उद्देश्य बड़े पैमाने पर भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करना था।

साल 2008 में अहमदाबाद शहर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। इन हमलों में कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियों ने इस मामले में इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कई लोगों को आरोपी बनाया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में दोषियों की भूमिका केवल सीमित स्तर तक नहीं थी, बल्कि वे एक संगठित आतंकी साजिश का हिस्सा थे। अदालत ने गुजरात और केरल में आयोजित कथित आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में उनकी भागीदारी का भी उल्लेख किया।

अदालत ने कहा कि इन प्रशिक्षण शिविरों और अन्य गतिविधियों से यह साबित होता है कि आरोपियों ने आतंकी साजिश को अंजाम देने के लिए तैयारी की थी। कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए उम्रकैद की सजा पाए 11 दोषियों की सजा को भी सही ठहराया।

फैसले में अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति, पीड़ितों की संख्या और समाज पर पड़े प्रभाव को देखते हुए यह मामला बेहद गंभीर श्रेणी में आता है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में न्याय व्यवस्था का उद्देश्य समाज में सुरक्षा और विश्वास बनाए रखना भी होता है।

गौरतलब है कि अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को कई स्थानों पर लगातार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में आम लोगों को निशाना बनाया गया था। घटना के बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं और मामले की जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद निचली अदालत ने कई आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें से 38 लोगों को मौत की सजा और 11 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

इसके बाद मामले में सजा की पुष्टि के लिए गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

अदालत ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि आतंकवादी घटनाओं का प्रभाव केवल तत्काल पीड़ितों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज में भय और असुरक्षा पैदा करता है। ऐसे मामलों में अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखना जरूरी है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुरक्षा और कानूनी विशेषज्ञों ने इसे आतंकवाद के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि अदालत ने साजिश की व्यापकता और अपराध के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए फैसला दिया है।

वहीं, दोषियों के पास अब आगे कानूनी विकल्प मौजूद हैं। वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

फिलहाल गुजरात हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में कानूनी प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने वाली योजनाबद्ध हिंसा को बेहद गंभीर अपराध के रूप में देखा जाएगा।

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