गुजरात

Ahmedabad : बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर मुआवजे का विवाद

Kavita2
12 July 2026 5:18 PM IST
Ahmedabad : बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर मुआवजे का विवाद
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अहमदाबाद : मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट (MAHSR) से जुड़ा जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का मामला अब गुजरात हाई कोर्ट पहुंच गया है। बुलेट ट्रेन परियोजना को लागू करने वाली संस्था MAHSR ने लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट अथॉरिटी (LARRA) के उन आदेशों को चुनौती दी है, जिनमें जमीन मालिकों को अधिक मुआवजा देने के निर्देश दिए गए थे।

MAHSR की ओर से गुजरात हाई कोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि यदि अतिरिक्त मुआवजे का बोझ परियोजना पर डाला गया तो इससे देश की महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल परियोजना प्रभावित हो सकती है। मामले की सुनवाई जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आरटी वच्छानी की खंडपीठ के समक्ष हुई।

सुनवाई के दौरान गुजरात के एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने अदालत के सामने परियोजना की अहमियत को रखते हुए कहा कि यदि इस तरह का आर्थिक बोझ परियोजना पर डाला गया तो बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में गंभीर परेशानी आ सकती है। उन्होंने कहा कि यह केवल मुआवजे का मामला नहीं है, बल्कि एक बड़े राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट से जुड़ा विषय है।

एडवोकेट जनरल ने अदालत में कहा, "यह प्रोजेक्ट रुक जाएगा। अगर यह खास बोझ हम पर डाला गया तो हमारे पास बुलेट ट्रेन नहीं होगी। मैं एक बहुत बड़ा बयान दे रहा हूं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परियोजना को तय समय और लागत के भीतर पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है।

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है। यह देश के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने वाली योजना मानी जा रही है। परियोजना के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल सेवा शुरू करने की योजना है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।

परियोजना के लिए गुजरात और महाराष्ट्र में बड़ी मात्रा में जमीन का अधिग्रहण किया गया है। जमीन अधिग्रहण के दौरान कई जमीन मालिकों ने मुआवजे की राशि को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। कुछ मामलों में LARRA ने जमीन मालिकों के पक्ष में फैसला देते हुए अधिक मुआवजा देने के आदेश जारी किए।

MAHSR का कहना है कि LARRA द्वारा तय की गई अतिरिक्त राशि से परियोजना की लागत पर असर पड़ेगा। संस्था ने अदालत से इन आदेशों की समीक्षा करने और मुआवजे की राशि को लेकर उचित निर्देश देने की मांग की है।

वहीं, जमीन मालिकों का पक्ष है कि उन्हें उनकी जमीन के वास्तविक मूल्य और कानून के अनुसार उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उनका कहना है कि जमीन अधिग्रहण के कारण उन्हें अपनी संपत्ति और आजीविका से जुड़े कई बदलावों का सामना करना पड़ा है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला जमीन अधिग्रहण कानून और बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट के बीच संतुलन से जुड़ा हुआ है। अदालत को यह तय करना होगा कि जमीन मालिकों के अधिकारों और राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के हितों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए।

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को जापान के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना को भारत में आधुनिक रेल तकनीक और तेज परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

MAHSR की याचिका पर आगे की सुनवाई में अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुनेगी। इस मामले के फैसले का असर न केवल बुलेट ट्रेन परियोजना पर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में देश में लागू होने वाली अन्य बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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