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Gandhinagar गांधीनगर: जिले के पालाज गांव में हर साल होली का आयोजन सदियों से चलता आ रहा है। महराज प्रदीप व्यास के अनुसार, यह होली उत्सव सात सौ वर्षों से अधिक समय से गांव में मनाया जा रहा है। व्यास ने बताया कि होली के दिन पूरे गांव के लोग इकट्ठा होते हैं और हजारों लकड़ियों को इकट्ठा करके उत्सव की तैयारी करते हैं। इस दौरान पूरे गांव में रंगों, गुलाल और पिचकारियों के साथ खेल का आनंद लिया जाता है। गांव के लोग इस अवसर पर पारंपरिक गीत और नृत्य के माध्यम से उत्सव को और भी जीवंत बनाते हैं।
महिला और पुरुष दोनों ही इस होली में सक्रिय भाग लेते हैं। गांव के बुजुर्ग इसे सांस्कृतिक विरासत के रूप में मानते हैं और युवा इसे जोश और उमंग के साथ मनाते हैं। व्यास ने बताया कि यह पर्व केवल रंगों का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह गांव के लोगों के बीच भाईचारे, सहयोग और सामूहिक संस्कृति को भी मजबूत करता है।
उन्होंने कहा, “हमारे पालाज गांव की होली में हर कोई शामिल होता है। यह उत्सव हमारी परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यहाँ लोग मिलकर लकड़ियों का ढेर बनाते हैं, आग जलाते हैं और रंगों के साथ त्योहार मनाते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस पर्व के दौरान विशेष भोजन और व्यंजन भी बनते हैं, जिसे सभी मिलकर खाते हैं। यह पर्व केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक शिक्षा का अवसर भी प्रदान करता है।
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