गुजरात

बोटाद में फसल नुकसान सहायता के लिए 10 दिन में 57,000 आवेदन, 70% काम पूरा

SHIDDHANT
24 Nov 2025 8:46 PM IST
बोटाद में फसल नुकसान सहायता के लिए 10 दिन में 57,000 आवेदन, 70% काम पूरा
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Gujrat गुजरात: बेमौसम बारिश से फसलों को हुए व्यापक नुकसान के बीच बोटाद जिले में किसानों द्वारा सरकारी सहायता के लिए आवेदन की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है। जिला कृषि अधिकारी यू. जे. पटेल ने बताया कि आवेदन फार्म जमा करने की शुरुआत 14 नवंबर से हुई थी, और 24 नवंबर दोपहर तक यानी सिर्फ 10 दिनों में ही 57,000 फॉर्म जमा हो चुके हैं। यह आंकड़ा स्थिति की गंभीरता और किसानों की परेशानी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। अधिकारी पटेल के अनुसार जिले में फसल क्षति सहायता के लिए फार्म जमा कराने का लगभग 70% काम पूरा हो चुका है, जबकि 30% प्रक्रिया अभी बाकी है। बाकी किसानों को भी जल्दी आवेदन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है ताकि राहत वितरण समय पर पूरा किया जा सके। कृषि विभाग और पंचायत टीमों को गांव-गांव भेजकर किसानों को फार्म भरने में मदद दी जा रही है।

जिले में हाल ही में हुई अनियमित बारिश, ओलावृष्टि और तेज़ हवाओं ने मूंगफली, कपास, ज्वार, सब्जियों सहित कई प्रमुख फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कई किसानों ने बताया कि पौधे गिर गए, खेतों में जलभराव हो गया, और उत्पादन आधे से भी कम रह जाने की आशंका है। इस स्थिति ने किसानों की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कृषि अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कियोस्क, सहकारी समितियों और पंचायत कार्यालयों में अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया है। किसानों को जमीन संबंधी दस्तावेज, बैंक खाते का विवरण और फसल नुकसान के प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं, जिसके आधार पर पात्र किसानों को राहत राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।

कई गांवों में कृषि सर्वे टीमों द्वारा नुकसान का प्राथमिक आकलन भी जारी है। अधिकारी पटेल ने बताया कि सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ज्यादा से ज्यादा प्रभावित किसानों को जल्द सहायता उपलब्ध कराई जाए और आवेदन निपटान में किसी तरह की देरी न हो। स्थानीय किसान संगठनों ने सरकार से नुकसान का सही मूल्यांकन कर पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि मौसम परिवर्तन के कारण किसानों पर लगातार खतरा बढ़ रहा है, इसलिए राहत वितरण को मजबूत और पारदर्शी बनाना ज़रूरी है। बोटाद जिले में तेज़ी से बढ़ते आवेदनों का आंकड़ा यह बताता है कि बेमौसम बारिश का असर व्यापक रहा है और किसानों के लिए सरकारी राहत ही उम्मीद का सहारा बनी हुई है।
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