गुजरात
गुजरात में खुलेंगे 5 नए FTO पायलट ट्रेनिंग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
Ratna Netam
6 Oct 2026 3:07 PM IST

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अहमदाबाद। गुजरात तेजी से देश के प्रमुख पायलट ट्रेनिंग केंद्रों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। राज्य में फिलहाल पांच फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन यानी FTO संचालित हो रहे हैं, जबकि पांच और FTO विकसित किए जा रहे हैं। इनके शुरू होने के बाद गुजरात में कुल 10 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन हो जाएंगे। राज्य सरकार का उद्देश्य तेजी से बढ़ते भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित पायलट और अन्य एविएशन प्रोफेशनल तैयार करना, निजी निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, गुजरात में मौजूद फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों ने अब तक 5,200 से ज्यादा एविएशन छात्रों को ट्रेनिंग दी है। इनमें से 3,200 से अधिक अभ्यर्थियों ने कमर्शियल पायलट लाइसेंस यानी CPL हासिल किया है। इसके अलावा 200 से ज्यादा छात्र अभी विभिन्न FTO में पायलट ट्रेनिंग ले रहे हैं। इन आंकड़ों को राज्य में एविएशन स्किल डेवलपमेंट के बढ़ते दायरे का संकेत माना जा रहा है।
गुजरात में अभी संचालित पांच FTO में से चार राज्य के स्वामित्व वाली हवाई पट्टियों पर काम कर रहे हैं, जबकि एक संस्थान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से उपलब्ध कराई गई जमीन पर संचालित है। मेहसाणा में स्काईनेक्स एयरो प्राइवेट लिमिटेड और ब्लू रे एविएशन, अमरेली में विजन फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और गुजरात फ्लाइंग क्लब, जबकि भावनगर में ड्यून्स एविएशन प्रशिक्षण दे रहे हैं।
राज्य में विकसित हो रहे पांच नए FTO में मेहसाणा में सिल्वर ओक फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, अमरेली में एयरो फ्रेयर इंक., मांडवी में आदियोगी एंटरप्राइज, और अंकलेश्वर में विजन फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट तथा JITM स्किल्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन संस्थानों के शुरू होने के बाद राज्य का पायलट ट्रेनिंग नेटवर्क काफी बड़ा हो जाएगा।
गुजरात सरकार इस विस्तार के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर जोर दे रही है। इसके तहत राज्य की मौजूदा विमानन संपत्तियों, एयरस्ट्रिप और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग निजी कंपनियों के साथ मिलकर किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से एक ओर ट्रेनिंग सुविधाओं का विस्तार होगा, वहीं दूसरी ओर निजी क्षेत्र से निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता भी आएगी।
देश में एविएशन सेक्टर की तेज रफ्तार बढ़ोतरी के कारण आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में पायलटों की जरूरत पड़ने का अनुमान है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की 2025-26 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत को अगले दशक में लगभग 30,000 से 40,000 नए पायलटों की जरूरत पड़ सकती है। इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में देश में 1,652 CPL जारी किए गए, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक थे।
केंद्र सरकार भी घरेलू पायलट ट्रेनिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। अप्रैल 2026 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया था कि देश में 41 DGCA-स्वीकृत FTO 63 फ्लाइंग बेस पर संचालित हो रहे थे। इसके अलावा अगस्त 2026 में सात AAI एयरपोर्ट पर 11 नए FTO स्थापित करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए गए। इन नए केंद्रों से देश की सालाना पायलट ट्रेनिंग क्षमता में करीब 750 कैडेट की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
ऐसे माहौल में गुजरात अपने राज्य-स्तरीय नेटवर्क को बढ़ाकर देश की पायलट ट्रेनिंग जरूरतों में बड़ी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। राज्य के लिए एक बड़ा फायदा मौसम और एयरस्ट्रिप नेटवर्क भी माना जा रहा है। गुजरात में साल के अधिकांश समय उड़ान प्रशिक्षण के अनुकूल मौसम रहता है, जबकि कई एयरपोर्ट और हवाई पट्टियां ट्रेनिंग उड़ानों के लिए जरूरी ऑपरेशनल विकल्प उपलब्ध कराती हैं।
गुजरात फ्लाइंग क्लब की मौजूदगी राज्य की एविएशन ट्रेनिंग विरासत को भी दर्शाती है। यह संस्थान 1958 में वडोदरा एयरपोर्ट पर शुरू हुआ था और इसे देश के पुराने DGCA-स्वीकृत फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों में गिना जाता है। अब पुराने संस्थानों के साथ निजी क्षेत्र के नए FTO जुड़ने से गुजरात का ट्रेनिंग इकोसिस्टम आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
FTO केवल पायलट ही तैयार नहीं करते, बल्कि इनके साथ कई अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार बनते हैं। प्रत्येक फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर को ट्रेनर एयरक्राफ्ट, फ्लाइट सिम्युलेटर, मेंटेनेंस हैंगर, ईंधन सुविधा, क्लासरूम, हॉस्टल, ग्राउंड इंस्ट्रक्टर और प्रशासनिक कर्मचारियों की जरूरत होती है। इस कारण नए FTO शुरू होने से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ने की संभावना है।
सरकार एविएशन करियर को लेकर छात्रों को जानकारी और उद्योग से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। सितंबर 2026 में गुजरात के नागरिक उड्डयन विभाग ने ASPIRE 2026 कार्यक्रम को सहयोग दिया था, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को एविएशन करियर, स्किल, ट्रेनिंग की लागत और उद्योग की जरूरतों के बारे में सीधे विशेषज्ञों से जानकारी उपलब्ध कराना था।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का फोकस अब केवल पायलट ट्रेनिंग सेंटर की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक एविएशन स्किल इकोसिस्टम तैयार करने पर है। इसके जरिए पायलटों के साथ-साथ ग्राउंड स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य विमानन पेशेवरों के लिए भी संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
पांच नए FTO के शुरू होने के बाद गुजरात में कुल संख्या 10 हो जाएगी। 5,200 से ज्यादा प्रशिक्षित एविएशन छात्रों और 3,200 से अधिक CPL धारकों के मौजूदा रिकॉर्ड के साथ राज्य अब अपनी ट्रेनिंग क्षमता को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रहा है। तेजी से बढ़ते भारतीय विमानन बाजार के बीच यह विस्तार गुजरात को पायलट ट्रेनिंग और एविएशन स्किल डेवलपमेंट के महत्वपूर्ण केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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