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गुजरात के 4 जिले सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को मिलेगा 17 हजार रुपये तक मुआवजा

Kavita2
27 Oct 2026 11:14 AM IST
गुजरात के 4 जिले सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को मिलेगा 17 हजार रुपये तक मुआवजा
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गांधीनगर। गुजरात में इस साल मानसून की कमजोर बारिश ने किसानों और पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब आठ वर्षों तक अपेक्षाकृत अच्छी बारिश के बाद राज्य के कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने सोमवार, 26 अक्टूबर को चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का बड़ा फैसला लिया। इनमें देवभूमि द्वारका, कच्छ, जामनगर और पोरबंदर शामिल हैं। सरकार ने प्रभावित किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सहायता तथा रोजगार संबंधी राहत उपायों की भी घोषणा की है।

गुजरात में 89 प्रतिशत बारिश, फिर भी चार जिलों में सूखे की स्थिति

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि इस साल गुजरात में सामान्य मानसूनी बारिश का लगभग 89 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है। हालांकि, प्रदेश के सभी इलाकों में बारिश का वितरण समान नहीं रहा।

विशेष रूप से सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के चार जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई। इसके कारण खेती और पशुपालन से जुड़े परिवारों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

सरकार ने मानसून समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार की वर्ष 2016 की सूखा आकलन संबंधी गाइडलाइन के आधार पर प्रभावित जिलों की स्थिति का मूल्यांकन किया। इसके बाद चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया गया।

देवभूमि द्वारका में सबसे ज्यादा बारिश की कमी

आंकड़ों के अनुसार, सबसे गंभीर स्थिति देवभूमि द्वारका जिले में सामने आई है। यहां सामान्य मौसमी वर्षा का केवल 16.5 प्रतिशत पानी बरसा। वहीं पोरबंदर में 30.9 प्रतिशत, जामनगर में 43.3 प्रतिशत और कच्छ में 57.6 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य का औसत वर्षा प्रतिशत अपेक्षाकृत बेहतर होने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में बारिश की भारी कमी रही है।

बारिश के इस असमान वितरण का असर खरीफ फसलों की पैदावार, मिट्टी में नमी और आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर पड़ने की आशंका है।

किसानों को मिलेगा प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये का मुआवजा

सूखे से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, उन्हें राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के निर्धारित प्रावधानों के तहत प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता दी जाएगी।

यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर तक सीमित रहेगी। इस प्रकार पात्र किसान को अधिकतम 17 हजार रुपये की फसल नुकसान सहायता मिल सकती है।

सरकार का कहना है कि इस आर्थिक मदद का उद्देश्य किसानों को तत्काल राहत पहुंचाना है, ताकि फसल खराब होने के बाद उनकी आर्थिक परेशानियों को कुछ हद तक कम किया जा सके। हालांकि, वास्तविक सहायता प्रभावित फसल और निर्धारित पात्रता शर्तों के आधार पर मिलेगी।

पशुपालकों को 2 रुपये किलो चारा, पशु आश्रय स्थलों के लिए सहायता

सूखे का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। बारिश की कमी के कारण पशुओं के चारे और पानी की उपलब्धता भी चिंता का विषय बनी हुई है।

इसी को देखते हुए गुजरात सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में रियायती दरों पर पशुचारा उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की है। सरकार द्वारा चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पर्याप्त चारा भंडार बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पशु आश्रय स्थलों को पशुओं के रखरखाव के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता देने का प्रावधान किया गया है।

इस कदम से विशेष रूप से उन ग्रामीण परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनकी आजीविका दूध उत्पादन और पशुपालन पर निर्भर है।

1 नवंबर से लागू होंगे राहत उपाय, 150 दिन का रोजगार

सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों के ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार सहायता का भी ऐलान किया है। प्रभावित जिलों में ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था के तहत 150 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है।

राहत संबंधी प्रावधान 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगे। सूखा प्रभावित घोषित करने की व्यवस्था छह महीने तक लागू रहेगी।

सरकार का उद्देश्य ऐसे परिवारों को आर्थिक सहारा देना है जिनकी आमदनी बारिश की कमी और खेती प्रभावित होने से घट गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर आमदनी बढ़ाने और आजीविका के संकट को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रबी फसलों की सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर भी सरकार का ध्यान

गुजरात सरकार ने आगामी रबी सीजन को देखते हुए सिंचाई व्यवस्था की भी समीक्षा की है।

राज्य के 206 प्रमुख बांधों में कुल जल भंडारण क्षमता का लगभग 66 प्रतिशत पानी उपलब्ध बताया गया है। खरीफ सीजन के दौरान 44 बांधों के कमांड क्षेत्रों में मांग के अनुसार सिंचाई का पानी दिया गया था।

आगामी रबी सीजन में 76 बांधों के कमांड क्षेत्रों में जल उपलब्धता के आधार पर एक से चार बार सिंचाई के लिए पानी देने की योजना है।

इसके अलावा राज्य सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए पेयजल को प्राथमिकता देते हुए 30 जून 2027 तक पीने के पानी का भंडार सुरक्षित रखने की बात कही है।

कांग्रेस और AAP के आंदोलन के बीच सरकार का फैसला

गुजरात में कम बारिश के कारण किसानों की बढ़ती परेशानियों को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लगातार सरकार से राहत की मांग कर रही थीं।

दोनों विपक्षी दल प्रभावित क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने और किसानों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग उठा रहे थे।

सरकार की घोषणा के बाद भी राहत की राशि को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने वास्तविक फसल नुकसान के आधार पर मुआवजा देने की मांग की है, जबकि आम आदमी पार्टी ने अधिक आर्थिक सहायता की जरूरत बताई है।

वहीं भाजपा ने सरकार के फैसले को किसानों और पशुपालकों के हित में उठाया गया कदम बताया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किसानों को दिया भरोसा

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि राज्य सरकार कठिन परिस्थितियों में किसानों और पशुपालकों के साथ खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

सरकार की घोषणा से हजारों किसानों और पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि घोषित मुआवजा, चारा, रोजगार और सिंचाई सुविधाएं जरूरतमंद परिवारों तक कितनी जल्दी पहुंच पाती हैं।

सूखे से जूझ रहे गुजरात के इन चार जिलों में सरकारी राहत योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन आगामी महीनों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

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