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गुजरात में 17 हजार करोड़ का निवेश, पिपावव पोर्ट होगा आधुनिक

SHIDDHANT
29 Oct 2025 8:02 PM IST
गुजरात में 17 हजार करोड़ का निवेश, पिपावव पोर्ट होगा आधुनिक
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Gujarat गुजरात: समुद्री व्यापार और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गुजरात मेरीटाइम बोर्ड (GMB) और गुजरात पिपावव पोर्ट लिमिटेड (एपीएम टर्मिनल्स) के बीच ₹17,000 करोड़ के निवेश से पिपावव पोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में हुए। यह महत्वाकांक्षी परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “समुद्र से समृद्धि (Samudra se Samriddhi)” के विजन को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। परियोजना के तहत पिपावव पोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की योजना है, जिससे गुजरात देश का अग्रणी समुद्री व्यापारिक केंद्र बनेगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस अवसर पर कहा कि यह निवेश न केवल गुजरात की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा बल्कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर भी खोलेगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात ने हमेशा इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छुई हैं। पिपावव पोर्ट का विस्तार राज्य की ‘ब्लू इकॉनमी’ को मजबूत करेगा। गुजरात मेरीटाइम बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के तहत पोर्ट की कार्गो हैंडलिंग क्षमता में कई गुना वृद्धि की जाएगी। साथ ही, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को भी बेहतर बनाया जाएगा ताकि निर्यात-आयात प्रक्रियाएं अधिक कुशल बन सकें।
एपीएम टर्मिनल्स (Gujarat Pipavav Port Ltd.) ने कहा कि यह निवेश पोर्ट को “सस्टेनेबल और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन हब” के रूप में विकसित करेगा। परियोजना के पूरा होने पर लगभग 25,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जिससे सौराष्ट्र और तटीय इलाकों की अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। गुजरात सरकार के अनुसार, राज्य की समुद्री नीति का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में समुद्री व्यापार को दोगुना करना है। वर्तमान में गुजरात के पास भारत की कुल समुद्री तटरेखा का लगभग 1,600 किलोमीटर हिस्सा है और यह देश का सबसे बड़ा मैरिटाइम हब माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिपावव पोर्ट का आधुनिकीकरण न केवल व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा योगदान देगा। यह समझौता गुजरात के “वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2025” से पहले एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेत माना जा रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा राज्य की औद्योगिक क्षमता पर और मजबूत होगा।
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