गोवा

तरुण तेजपाल दोषी, बरी का फैसला पलटा

Kavita2
6 Aug 2026 12:57 PM IST
तरुण तेजपाल दोषी, बरी का फैसला पलटा
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पणजी: बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने ‘तहलका’ मैगज़ीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न और रेप मामले में दोषी ठहराया है। हाई कोर्ट के इस फैसले के साथ ही निचली अदालत द्वारा वर्ष 2021 में दिए गए बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया गया है। अदालत ने तेजपाल को दोषी करार देते हुए सजा की अवधि पर फैसला बाद में सुनाने की बात कही है।

जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंदेकर की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के फैसले में मौजूद तथ्यों और सबूतों का दोबारा मूल्यांकन करने के बाद आरोपी को दोषी पाया गया है।

यह मामला वर्ष 2013 का है, जब ‘तहलका’ मैगज़ीन के गोवा में आयोजित वार्षिक ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान एक पूर्व महिला कर्मचारी ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया था कि नवंबर 2013 में गोवा के एक रिजॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लिफ्ट के अंदर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया।

आरोप सामने आने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया और जांच शुरू की गई। इसके बाद तरुण तेजपाल के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।

गोवा की निचली अदालत ने वर्ष 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। हाई कोर्ट ने इस अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले की समीक्षा की और अब उसे रद्द कर दिया है।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद मामले में एक नया मोड़ आ गया है। अदालत ने तेजपाल को दोषी ठहराया है, हालांकि सजा की अवधि पर निर्णय अभी सुरक्षित रखा गया है। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोषी को कितनी अवधि की सजा दी जाएगी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया जाता है, तो इसमें कठोर सजा का प्रावधान है। इस धारा के तहत न्यूनतम सजा से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, अंतिम सजा अदालत द्वारा मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तय की जाएगी।

तरुण तेजपाल पत्रकारिता जगत के चर्चित नामों में रहे हैं। उन्होंने ‘तहलका’ मैगज़ीन के जरिए खोजी पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई थी। वर्ष 2013 में सामने आए इस मामले के बाद उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगे और इसके बाद लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली।

इस मामले में पीड़िता के आरोप, जांच प्रक्रिया और अदालतों के अलग-अलग फैसले लंबे समय तक चर्चा का विषय रहे। निचली अदालत के फैसले के बाद भी मामला समाप्त नहीं हुआ था, क्योंकि राज्य सरकार ने उसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब आगे की प्रक्रिया सजा के निर्धारण और कानूनी विकल्पों पर केंद्रित होगी। आरोपी पक्ष के पास उच्च अदालतों में आगे अपील करने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

इस फैसले को यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। अदालतों में ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान सबूतों, गवाहियों और घटना से जुड़े सभी पहलुओं का विस्तृत परीक्षण किया जाता है।

कुल मिलाकर, तरुण तेजपाल मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला पिछले फैसले से अलग है और इससे करीब एक दशक पुराने मामले में नया कानूनी मोड़ आया है। अब सभी की नजरें अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर होंगी।

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