
पणजी। तहलका पत्रिका के संस्थापक-संपादक तरुण तेजपाल ने 2013 के दुष्कर्म मामले में सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सुप्रीम कोर्ट से आत्मसमर्पण में छूट नहीं मिलने के बाद तेजपाल ने अदालत पहुंचकर सरेंडर किया। इसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में लेकर कोलवाले स्थित केंद्रीय कारागार भेज दिया गया।
तेजपाल ने अपनी दोषसिद्धि और सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। शीर्ष अदालत ने अगस्त में आत्मसमर्पण से छूट देने की उनकी मांग खारिज करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने और इससे संबंधित प्रमाणपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सरेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनकी अपील पर सुनवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
मापुसा अदालत के बाहर पत्रकारों से बातचीत में तेजपाल ने कहा कि मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है और उन्हें विश्वास है कि न्याय मिलेगा। हालांकि, उनकी अपील अभी विचाराधीन है और सुप्रीम कोर्ट ने अब तक दोषसिद्धि या सजा के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। उनका आत्मसमर्पण अपील की सुनवाई से जुड़ी एक प्रक्रियात्मक आवश्यकता है।
हाई कोर्ट ने पलटा था बरी करने का फैसला
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित तहलका के कार्यक्रम से जुड़ा है। तेजपाल की एक पूर्व महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि होटल की लिफ्ट में 7 और 8 नवंबर 2013 को तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया। मामला सामने आने के बाद गोवा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। तेजपाल को नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया और बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर रिहा किया गया था।
कई वर्षों तक चली सुनवाई के बाद गोवा की सत्र अदालत ने मई 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। निचली अदालत के फैसले को गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ में चुनौती दी। राज्य सरकार ने अपनी अपील में कहा था कि सत्र अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और पीड़िता के व्यवहार को लेकर रूढ़िवादी धारणाओं के आधार पर निष्कर्ष निकाला।
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने 6 अगस्त 2026 को निचली अदालत का फैसला पलट दिया। हाई कोर्ट ने तेजपाल को गंभीर दुष्कर्म और संबंधित अपराधों में दोषी ठहराया तथा 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यौन हिंसा की पीड़िता से किसी एक निर्धारित या रूढ़िवादी तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
पीड़िता के व्यवहार पर टिप्पणी को बताया अनुचित
हाई कोर्ट ने सत्र अदालत के फैसले में पीड़िता के आचरण को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी गंभीर आपत्ति जताई थी। अदालत ने कहा कि किसी यौन अपराध के बाद प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। पीड़िता घटना के बाद किस प्रकार व्यवहार करती है, इसे उसकी शिकायत की सत्यता जांचने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता।
हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा साक्ष्यों के मूल्यांकन को अनुचित और दोषपूर्ण बताते हुए कहा था कि सुनवाई के दौरान पीड़िता के निजी जीवन, पुराने संबंधों तथा व्यक्तिगत संदेशों से जुड़े प्रश्नों को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया गया। अदालत के मुताबिक इस तरह का दृष्टिकोण कानून में उपलब्ध सुरक्षा और पीड़िता की गरिमा के अनुरूप नहीं था।
हाई कोर्ट ने गंभीर दुष्कर्म के दो मामलों में न्यूनतम 10-10 वर्ष की सजा सुनाई थी। दोनों सजाएं साथ-साथ चलने के कारण तेजपाल को प्रभावी रूप से 10 वर्ष का सश्रम कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त अन्य संबंधित अपराधों में भी सजाएं सुनाई गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की अपील
तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आत्मसमर्पण से छूट देने की मांग की थी। दलील दी गई कि मामला वर्ष 2013 का है, तेजपाल लंबे समय तक जमानत पर रहे और इस दौरान उनके आचरण को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई।
गोवा सरकार ने इस मांग का विरोध किया। राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि तेजपाल को गंभीर अपराध में दोषी ठहराया गया है और उन्हें सजा के खिलाफ अपील से पहले आत्मसमर्पण की कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने छूट का आवेदन खारिज करते हुए तेजपाल को तीन सप्ताह का समय दिया था। उनकी अपील पर सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है।
गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए तेजपाल की सजा बढ़ाने की मांग की है। राज्य का तर्क है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए 10 वर्ष की सजा पर्याप्त नहीं है और इसे उम्रकैद में बदला जाना चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट तेजपाल की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील और राज्य सरकार की सजा बढ़ाने की मांग पर विचार करेगा।
आत्मसमर्पण के बाद भेजे गए केंद्रीय जेल
सोमवार को मापुसा की अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद तेजपाल को पुलिस ने हिरासत में लिया और कोलवाले स्थित केंद्रीय जेल भेज दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, तेजपाल ने अदालत के बाहर कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद है।
कानूनी रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की दोषसिद्धि और 10 वर्ष की सजा फिलहाल प्रभावी है। सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित होने का अर्थ दोषसिद्धि पर रोक नहीं है। शीर्ष अदालत आने वाली सुनवाई में अपील स्वीकार करने, जमानत या सजा निलंबन की मांग और मामले के गुण-दोष पर आगे की प्रक्रिया तय कर सकती है।





