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पणजी: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'तहलका' के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। साथ ही, कोर्ट ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में उनकी सज़ा और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर जल्द सुनवाई करने की मांग भी ठुकरा दी।
कोर्ट की बेंच ने तेजपाल और गोवा सरकार समेत संबंधित पक्षों को अलग-अलग याचिकाओं पर नोटिस भी जारी किए।
एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने बताया कि तेजपाल के वकील ने अंतरिम राहत और अपील पर जल्द सुनवाई की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ही अनुरोध ठुकरा दिए। कोर्ट ने गोवा सरकार को तेजपाल की उस अपील पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट (गोवा बेंच) द्वारा सुनाई गई सज़ा और दोषसिद्धि को चुनौती दी है।
तेजपाल ने 14 सितंबर को ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर किया था। इससे पहले पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने उनके सरेंडर को टालने की याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें सज़ा काटने के लिए दो हफ़्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने 6 अगस्त के अपने फैसले में तेजपाल के बरी होने के आदेश को पलटते हुए उन्हें 10 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करते हुए उन्हें सरेंडर करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया था।
इसके अलावा, गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक 'स्पेशल लीव पिटिशन' (SLP) दाखिल की है, जिसमें तेजपाल की 10 साल की कठोर कैद की सज़ा को बढ़ाकर आजीवन कारावास में बदलने की मांग की गई है।
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