
पणजी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई-गोवा हाईवे के विस्तार और निर्माण कार्य में हुई लंबी देरी पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी और शर्मिंदगी जताई है। उन्होंने कहा कि परियोजना में अपेक्षा से अधिक समय लगने के कारण वह इसके पूरा होने के बाद आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे।
गडकरी ने बुधवार को पणजी के पास पोरवोरिम में छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर का उद्घाटन करने के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि मुंबई-गोवा हाईवे के विस्तार का काम लंबे समय से चल रहा है और इसकी प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हुई। परियोजना में हो रही देरी को लेकर केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक भी की है।
गडकरी ने कहा कि हाईवे के काम में हुई देरी से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर शर्मिंदगी महसूस हुई है। इसी वजह से उन्होंने पहले ही यह तय कर लिया था कि जब यह परियोजना पूरी होगी और इसका उद्घाटन किया जाएगा, तब वह समारोह में शामिल नहीं होंगे।
‘देरी से मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई’
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मुंबई-गोवा हाईवे के विस्तार के काम में हुई देरी से मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई, इसलिए मैंने पहले ही तय कर लिया था कि मैं इसके उद्घाटन में शामिल नहीं होऊंगा।”
गडकरी के इस बयान को परियोजना की प्रगति को लेकर केंद्र सरकार की गंभीरता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मुंबई और गोवा के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने वाली यह परियोजना लंबे समय से निर्माण और विस्तार के विभिन्न चरणों से गुजर रही है।
हाईवे का महत्व केवल महाराष्ट्र और गोवा के बीच संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी तट के कई प्रमुख शहरों और पर्यटन केंद्रों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सड़क मार्ग के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में परियोजना में लगातार हो रही देरी को लेकर यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच भी असंतोष रहा है।
अधिकारियों के साथ हुई बैठक
गडकरी ने बताया कि मंगलवार को उन्होंने अधिकारियों के साथ मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना को लेकर बैठक की थी। बैठक में परियोजना की प्रगति और लंबित कार्यों पर चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री ने संकेत दिया कि अब वह परियोजना की स्थिति का खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों की रिपोर्ट और कागजी प्रगति के बजाय वह सड़क पर यात्रा करके यह देखना चाहते हैं कि हाईवे का वास्तविक अनुभव यात्रियों के लिए कैसा है।
गडकरी ने कहा कि वह अक्टूबर में मुंबई एयरपोर्ट पहुंचेंगे और वहां से सड़क मार्ग से गोवा जाएंगे। इस दौरान वह स्वयं हाईवे का निरीक्षण करेंगे और यह देखेंगे कि यात्रियों के लिए सड़क पर सफर कितना सुविधाजनक और सुरक्षित है।
अक्टूबर में खुद करेंगे निरीक्षण
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मैं अक्टूबर में मुंबई एयरपोर्ट पहुंचूंगा, सड़क मार्ग से गोवा जाऊंगा, खुद हाईवे का निरीक्षण करूंगा और देखूंगा कि यात्रियों के लिए यह सफर सुविधाजनक है या नहीं।”
उनका यह फैसला परियोजना की जमीनी स्थिति की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम तौर पर मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां निर्माण कार्य की प्रगति की निगरानी करती हैं, लेकिन गडकरी स्वयं सड़क मार्ग से यात्रा करके स्थिति का जायजा लेने वाले हैं।
इस निरीक्षण के दौरान सड़क की गुणवत्ता, निर्माण की स्थिति, यातायात व्यवस्था और यात्रियों को होने वाली संभावित परेशानियों का आकलन किया जा सकता है। इसके अलावा लंबित हिस्सों को पूरा करने में आ रही दिक्कतों की भी समीक्षा होने की संभावना है।
पोरवोरिम में एलिवेटेड रोड का उद्घाटन
गडकरी ने बुधवार को पणजी के पास पोरवोरिम में छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर का उद्घाटन किया। यह कॉरिडोर क्षेत्र में यातायात को सुगम बनाने और सड़क पर दबाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है।
उद्घाटन समारोह के दौरान मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। गडकरी ने एक ओर नए सड़क बुनियादी ढांचे की परियोजना के उद्घाटन की जानकारी दी, वहीं दूसरी ओर मुंबई-गोवा हाईवे के काम में हुई देरी पर अपनी असंतुष्टि भी स्पष्ट कर दी।
यात्रियों की सुविधा पर जोर
गडकरी ने अपने बयान में केवल निर्माण पूरा करने पर जोर नहीं दिया, बल्कि यात्रियों के लिए सुविधाजनक सफर को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि हाईवे का निर्माण पूरा होने के बाद यह देखना जरूरी है कि लोगों को वास्तविक रूप से बेहतर यात्रा सुविधा मिल रही है या नहीं।
मुंबई-गोवा मार्ग पर बड़ी संख्या में यात्री, पर्यटक और व्यावसायिक वाहन चलते हैं। इसलिए सड़क की गुणवत्ता और यात्रा का समय दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। हाईवे के विस्तार से यातायात क्षमता बढ़ने, यात्रा को अधिक सुगम बनाने और सड़क संपर्क को बेहतर करने की उम्मीद की जा रही है।
गडकरी की ओर से परियोजना के उद्घाटन में शामिल नहीं होने की घोषणा ने हाईवे में हुई देरी को लेकर सरकार की गंभीरता को रेखांकित किया है। अब अक्टूबर में उनके प्रस्तावित सड़क निरीक्षण पर नजर रहेगी। इस निरीक्षण के दौरान वह खुद परियोजना की वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे और यात्रियों के अनुभव के आधार पर आवश्यक सुधारों पर ध्यान दे सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री के बयान से यह भी स्पष्ट है कि मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना को लेकर अब केवल निर्माण की प्रगति ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और यात्रियों की सुविधा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में अक्टूबर का निरीक्षण परियोजना के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।





